उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है और इसी बीच योगी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला ले लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) को निजी क्षेत्र को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग गई। लखनऊ के गोमती नगर में स्थित यह महत्वाकांक्षी सेंटर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता रहा है, जिसका निर्माण वर्ष 2012 में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ था।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रस्ताव के अनुसार जेपीएनआईसी को अगले 30 वर्षों के लिए निजी कंसोर्टियम को सौंपा जाएगा। ओपन बिडिंग प्रक्रिया के जरिए वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और रॉकवुड होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त कंसोर्टियम को इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह कंसोर्टियम अगले 30 वर्षों में सरकार को कुल 831 करोड़ रुपये की राशि चुकाएगा। इसके अलावा कंसोर्टियम को अनुबंध की शर्तों के तहत करोड़ों रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी भी प्राधिकरण के पास जमा करानी होगी।

गौरतलब है कि जेपीएनआईसी बीते करीब नौ वर्षों से बंद पड़ा था, जिसके चलते यह भवन धीरे-धीरे जर्जर हालत में पहुंच गया था। एलडीए अधिकारियों के मुताबिक इसके निर्माण में करीब 821 करोड़ रुपये की लागत आई थी और अब लीज के जरिए मिलने वाली राशि से यह पैसा धीरे-धीरे शासन को वापस लौटाया जाएगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि सेंटर में अभी इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल और फायर सुरक्षा जैसे बचे हुए कार्यों को पूरा करने में अतिरिक्त खर्च की जरूरत होगी।

इस फैसले के सामने आते ही समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और इस पूरे सौदे को लेकर सवाल खड़े किए। चुनावी माहौल के बीच सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से और सवाल उठना तय माना जा रहा है, हालांकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बता रही है।

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