Lucknow-Kanpur एक्सप्रेसवे पर फिलहाल भारी वाहनों को राहत मिलने के आसार नहीं हैं। कानपुर से लखनऊ की तरफ जाने वाले भारी वाहनों के प्रवेश पर लगी रोक अभी जारी रहेगी। सड़क की स्थिति और उसकी मजबूती को लेकर आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू की जाए या प्रतिबंध को आगे भी जारी रखा जाए। पहले माना जा रहा था कि एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम पूरा होने के बाद भारी वाहनों के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी जाएगी। हालांकि, अब अधिकारियों ने सड़क की तकनीकी जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट को प्राथमिकता दी है। ऐसे में मरम्मत के बाद भी भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क के कुछ हिस्सों में सामने आई दिक्कतों के बाद भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर एहतियाती कदम उठाया गया था। प्रशासन और एनएचएआई की कोशिश है कि सड़क की वास्तविक स्थिति को तकनीकी जांच के आधार पर परखा जाए, ताकि वाहनों की आवाजाही शुरू करने से पहले किसी तरह का जोखिम न रहे। इसी वजह से आईआईटी खड़गपुर की टीम की जांच रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट में सड़क की मौजूदा स्थिति, क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति और भारी वाहनों का दबाव झेलने की क्षमता जैसे पहलुओं पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ टोल वसूली पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। छह अगस्त से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली स्थगित है। एनएचएआई के आकलन के मुताबिक यहां प्रतिदिन करीब 42 लाख रुपये टोल के रूप में वसूले जाने थे। लगातार 41 दिनों तक टोल वसूली बंद रहने के कारण अब तक करीब 18 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है। यानी एक्सप्रेसवे से रोज होने वाली टोल आय फिलहाल पूरी तरह प्रभावित है।
एनएचएआई के मुताबिक टोल से होने वाले इस नुकसान का बोझ सीधे सरकारी खजाने पर नहीं डाला जाएगा। विभाग का कहना है कि टोल राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई निर्माणदायी एजेंसी पीएनसी से कराई जाएगी। इस संबंध में आगे की प्रक्रिया एक्सप्रेसवे की स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। फिलहाल एनएचएआई का पूरा फोकस सड़क की तकनीकी स्थिति को लेकर स्पष्ट रिपोर्ट मिलने पर है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानपुर से लखनऊ जाने वाले भारी वाहनों को एक्सप्रेसवे पर दोबारा कब प्रवेश मिलेगा। फिलहाल इसकी कोई निश्चित तारीख तय नहीं है। पहले मरम्मत पूरी होने के बाद प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब अंतिम फैसला आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट के आधार पर लेने की तैयारी है। रिपोर्ट आने के बाद सड़क की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
इसके बाद ही एनएचएआई और संबंधित अधिकारी यह तय करेंगे कि भारी वाहनों के लिए एक्सप्रेसवे को पूरी तरह खोला जाए, कुछ शर्तों के साथ आवाजाही शुरू की जाए या प्रतिबंध को कुछ और समय तक जारी रखा जाए। भारी वाहनों के चालकों को पुराने मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वहीं, टोल वसूली बंद रहने से एक्सप्रेसवे के राजस्व पर भी लगातार असर पड़ रहा है। अब सभी की नजर आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट पर है, जिसके बाद एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।


