लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी की टीमों ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में नकदी के साथ कई डिजिटल डिवाइस और दूसरे दस्तावेज मिले हैं।

जानकारी के मुताबिक, फर्जीवाड़े से जुड़े मामले की जांच के तहत ईडी ने कुल 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी की टीमों ने संबंधित लोगों के ठिकानों और उन स्थानों पर दस्तावेज खंगाले, जहां से कथित तौर पर टोल प्लाजा से जुड़े वित्तीय लेनदेन और दूसरी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

1.03 करोड़ रुपये की नकदी मिली

छापेमारी के दौरान ईडी को कुल 1.03 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी अब इस रकम के स्रोत और उससे जुड़े लेनदेन की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों को शक है कि बरामद रकम का संबंध जांच के दायरे में आए कथित वित्तीय फर्जीवाड़े से हो सकता है। नकदी के साथ जांच टीमों ने कई डिजिटल डिवाइस भी अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल होने की बात कही जा रही है। इन उपकरणों से मिलने वाले डिजिटल डेटा की जांच के बाद मामले में आगे की तस्वीर साफ हो सकती है।

टोल प्लाजा के लेनदेन पर जांच

मामले की जांच का फोकस टोल प्लाजा से जुड़े वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं पर है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टोल से आने वाली रकम का हिसाब-किताब किस तरह रखा जाता था और कहीं इसमें किसी तरह की हेराफेरी तो नहीं की गई। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों का लेनदेन किन लोगों या संस्थाओं के बीच हुआ। इसके लिए बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और बरामद दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

14 ठिकानों पर एक साथ पहुंची टीमें

ईडी की कार्रवाई को इस तरह अंजाम दिया गया कि एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों पर जांच की जा सके। 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी होने से जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड हटाए जाने या नष्ट किए जाने की आशंका को रोकने में मदद मिली। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कई दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित किया है। अब इनकी जांच के जरिए कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और पैसों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।

बरामद डिजिटल डिवाइस से खुल सकते हैं कई राज

जांच एजेंसी के लिए डिजिटल डिवाइस की बरामदगी भी काफी अहम मानी जा रही है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य स्टोरेज डिवाइस में मौजूद चैट, ईमेल, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरी फाइलों की जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित फर्जीवाड़े की योजना कैसे बनाई गई और इसमें कौन-कौन लोग जुड़े थे। बरामद सामान और नकदी का वास्तविक संबंध किससे है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। ईडी अब दस्तावेजों और डिजिटल डेटा को आपस में मिलाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसी बरामद नकदी, दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है। अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध तरीके से अर्जित रकम से जुड़े ठोस सबूत सामने आते हैं, तो एजेंसी आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

ईडी की इस कार्रवाई के बाद NHAI टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला फिर चर्चा में है। 14 ठिकानों पर छापे और 1.03 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने के बाद अब जांच एजेंसी की नजर पैसों के स्रोत और पूरे लेनदेन की कड़ी पर है।

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