लखनऊ: सोमवार की सुबह लखनऊ में तेज बारिश हो रही थी। सड़कें भीग रही थीं और लोग अपने काम पर निकलने की तैयारी में थे, लेकिन पारा स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने कुछ और ही तय कर रखा था। अपनी पढ़ाई और स्कूल की दूसरी समस्याओं को लेकर नाराज छात्राएं बारिश की परवाह किए बिना स्कूल से निकल पड़ीं। करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलने के बाद वे दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर पहुंचीं और सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया।
छात्राओं के इस कदम से इलाके में अचानक हलचल बढ़ गई। सड़क पर छात्राओं के बैठने के कारण यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। हालांकि छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। उनका कहना था कि वे काफी समय से स्कूल की समस्याओं को झेल रही हैं, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ऐसा कदम नहीं उठाया गया, जिससे उन्हें लगे कि उनकी बात सच में सुनी जा रही है।
‘शिक्षक ही नहीं होंगे तो पढ़ाई कैसे होगी?’
प्रदर्शन कर रही छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायत स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर है। उनका कहना है कि कई विषयों की पढ़ाई पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में प्रभावित हो रही है। कक्षाएं नियमित तरीके से नहीं चल पा रही हैं और इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। छात्राओं का सवाल सीधा है, जब वे स्कूल में पढ़ने के लिए आती हैं और समय पर फीस या दूसरी सुविधाओं की चिंता नहीं करनी पड़ती, तो उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक क्यों नहीं हैं?
उनका कहना है कि पढ़ाई का नुकसान सिर्फ आज का नुकसान नहीं है। इसका असर उनकी परीक्षा, आगे की पढ़ाई और करियर तक पर पड़ सकता है। खासकर बोर्ड कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए यह चिंता और भी बड़ी है।
सिर्फ शिक्षक नहीं, खाने को लेकर भी नाराजगी
छात्राओं ने स्कूल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार खाना उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होता। आवासीय विद्यालय होने के कारण छात्राओं के लिए भोजन कोई छोटी बात नहीं है। वे स्कूल परिसर में रहकर पढ़ती हैं और ऐसे में उन्हें अच्छा और पौष्टिक भोजन मिलना जरूरी है। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी अपनी शिकायतें सामने रखीं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
बीमार पड़ने पर इलाज को लेकर भी शिकायत
छात्राओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका आरोप है कि जब कोई छात्रा बीमार पड़ती है तो उसे समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता। छात्राओं का कहना है कि स्कूल में रहने वाली बच्चियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा बेहद जरूरी है। अगर कोई छात्रा अचानक बीमार हो जाए तो उसे तुरंत चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए। लेकिन उनकी शिकायत है कि इस मामले में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
‘अब डीएम से ही बात करेंगे’
सड़क पर पहुंचने के बाद छात्राओं ने साफ कर दिया कि वे सिर्फ अधिकारियों के आश्वासन से वापस नहीं जाएंगी। उन्होंने मौके पर जिलाधिकारी को बुलाने की मांग रखी। छात्राओं का कहना था कि उन्होंने पहले भी अपनी समस्याएं बताई हैं, लेकिन जब उनकी बात का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें सड़क पर आना पड़ा। वे चाहती थीं कि जिलाधिकारी खुद मौके पर आएं, उनकी बातें सुनें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।
बारिश में भी नहीं हटीं छात्राएं
सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि तेज बारिश के बावजूद छात्राएं धरने पर बैठी रहीं। आमतौर पर बारिश में लोग घर या किसी सुरक्षित जगह की ओर भागते हैं, लेकिन इन छात्राओं ने अपनी शिकायतों को इतना गंभीर माना कि वे सड़क से हटने को तैयार नहीं हुईं। उनके प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि स्कूल की समस्याएं उनके लिए महज छोटी-मोटी शिकायतें नहीं हैं। वे इन्हें अपने भविष्य से जुड़ा मुद्दा मान रही हैं।
पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
छात्राओं के सड़क पर बैठने की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की। साथ ही यातायात को सामान्य कराने के प्रयास भी किए गए। फिलहाल छात्राएं अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं।
अब असली सवाल यही है कि उनकी शिकायतों की जांच के बाद स्कूल में शिक्षकों की कमी, भोजन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। बारिश में सड़क पर उतरी इन छात्राओं की आवाज ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है- अगर स्कूल में पढ़ने के लिए शिक्षक ही पर्याप्त नहीं होंगे, तो इन बच्चियों के सपनों और उनके भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?


