महोबा से व्यवस्था को कटघरे में खड़ी करने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां के कबरई विकासखंड के धरौन गाँव में सहकारी समिति के बाहर खुले आसमान के नीचे रखा हज़ारों कुंतल सरकारी गेहूं बारिश के पानी में भीगकर पूरी तरह बर्बाद हो गया है। मौसम विभाग की लगातार चेतावनियों के बावजूद ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों ने अनाज के उठान की ज़हमत नहीं उठाई, जिससे करोड़ों का अनाज अब सड़ चुका है।

एक तरफ सरकार दावों और विज्ञापनों में अन्न की एक-एक बूंद और दाने को सहेजने की बात करती है, तो वहीं दूसरी तरफ महोबा में सिस्टम की घोर लापरवाही ने करोड़ों रुपये के सरकारी अनाज को पानी में सड़ा दिया। पूरा मामला कबरई विकासखंड के धरौन गाँव में संचालित बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति का है। यहां किसानों से खरीदा गया करीब 6,747 कुंतल गेहूं खुले करीब तीन महीने से आसमान के नीचे सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। ​

दरअसल, सहकारी समिति के सभी गोदाम पहले से ही पूरी तरह भरे हुए थे। जगह न होने के कारण नया खरीदा गया अनाज बाहर मैदान में रख दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मौसम विभाग की तरफ से बार-बार बारिश की चेतावनी दी जा रही थी। समिति के सचिव ने भी आलाधिकारियों को आगाह किया था कि अनाज को सुरक्षित सरकारी दुकानों या गोदामों में भेजा जाए। लेकिन लापरवाह ठेकेदार और संबंधित विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। ​नतीजा यह हुआ कि पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश के कारण यह हज़ारों कुंतल गेहूं पानी में भीगकर पूरी तरह अंकुरित और सड़ चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा समय पर गाड़ियां नहीं भेजी जिस कारण यह बर्बादी हुई है। स्थानीय ग्रामीण विनोद ने बताया कि यहाँ अनाज को ले जाने के लिए कोई साधन ही नहीं आ रहा है, यह पूरी शासन-प्रशासन की गलती के कारण हुआ है। रोज़ बूंदाबांदी और बारिश हो रही है। पन्नी डालकर ढकने की कोशिश की जाती है, पर वह नाकाफी है। जिससे गल्ला खराब हो गया है जो अब खाने योग्य बिल्कुल नहीं बचा। बताया कि गाड़ियां नहीं आने से खुले में पड़ा अनाज लोड नहीं हो पाया और बारिश में भीगकर खराब हो गया। किसानों ने खून-पसीना बहाकर इसे समिति को बेचा था, लेकिन लापरवाही ने सब बर्बाद कर दिया।

बहरहाल, किसानों की मेहनत और सरकार के करोड़ों रुपये की इस बर्बादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। गोदाम और मंडियां फुल होने का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए इस निवाले को सड़ने देने वाले दोषियों पर आखिर कार्रवाई कब होगी?

रिपोर्ट-अमरकांत मिश्रा (महोबा)/सोनू सिंह

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