मथुरा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद ब्रज में उत्सव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और गोकुल में जन्मोत्सव के बाद अब नंदगांव में नंदोत्सव की धूम देखने को मिली। नंदबाबा के आंगन यानी नंदभवन में रविवार को ऐसा माहौल बना, मानो हजारों साल पुरानी कृष्ण जन्म की कथा एक बार फिर जीवंत हो उठी हो। कान्हा के जन्म के तीसरे दिन आयोजित इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और नंद के लाला के दर्शन कर खुद को धन्य माना।

नंदभवन में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। चारों तरफ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे सुनाई दे रहे थे। बरसाना से पहुंचे गोपों और नंदगांव के गोस्वामी समाज ने मिलकर परंपरागत तरीके से नंदोत्सव मनाया। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया।

लाला के दर्शन को पहुंचीं गोपियां

नंदोत्सव की सबसे खास झलक उस समय देखने को मिली, जब गोपियों के रूप में श्रद्धालु लाला के दर्शन के लिए नंदभवन पहुंचीं। माथे पर चंदन का लेप, पारंपरिक वेशभूषा और चेहरे पर भक्ति का भाव लिए गोप और गोपियां नंद के लाला की एक झलक पाने के लिए उत्सुक नजर आए। नंदभवन में प्रवेश करते ही वातावरण कृष्णमय हो गया। श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान के दर्शन करते रहे और लगातार ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।

बरसाना से पहुंचे गोपों का हुआ स्वागत

बृषभानु बाबा की नगरी बरसाना से गोप रविवार सुबह करीब 10 बजे नंदबाबा की नगरी नंदगांव पहुंचे। परंपरा के मुताबिक नंदगांव पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बरसाना और नंदगांव के बीच कृष्णकाल से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं की झलक पूरे आयोजन में देखने को मिली। दोनों स्थानों के गोस्वामी समाज के लोगों ने मिलकर जगमोहन में समाज गायन किया। करीब तीन घंटे तक चले इस गायन में ब्रज की पारंपरिक संस्कृति और कृष्ण भक्ति का अद्भुत मेल दिखाई दिया। भजन और पदों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। कई लोग तो भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।

‘नंद के द्वार बजी मंगल बधाई…’

समाज गायन के दौरान ब्रज की पारंपरिक लोकधुनों और पदों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। ‘नंद के द्वार बजी मंगल बधाई, गोपियां लाला देखन आईं’ जैसे पदों के गायन के साथ पूरा नंदभवन भक्ति में डूब गया। ब्रज की इस परंपरा में गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए कृष्ण जन्म और नंदोत्सव की पूरी कथा को जीवंत किया जाता है। यही वजह रही कि स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए श्रद्धालु भी इस आयोजन में पूरी तरह रम गए।

उपहार लुटाए गए तो मची लूटने की होड़

नंदोत्सव के दौरान जब श्रद्धालुओं के बीच प्रतीकात्मक रूप से उपहार लुटाए गए तो उन्हें पाने के लिए लोगों में उत्साह देखते ही बना। जैसे ही उपहार हवा में उछाले गए, उन्हें पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। लोग खुशी-खुशी उपहार बटोरते नजर आए। मान्यता और परंपरा से जुड़े इस आयोजन में उपहार पाना श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव रहा। नंदोत्सव के दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस उत्सव का हिस्सा बनता दिखाई दिया।

नंदमहल में हुआ प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध

नंदोत्सव का एक और आकर्षण नंदमहल में आयोजित प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध रहा। आयोजन के दौरान एक सेवायत गोस्वामी ने कमर से फेंटा निकालकर उसे हवा में लहराया और दूसरे गोस्वामी को युद्ध के लिए चुनौती दी। इसके बाद दूसरे गोस्वामी ने भगवान कृष्ण और बलराम को प्रणाम किया और चुनौती स्वीकार करते हुए अखाड़े में उतर गए। दोनों के बीच प्रतीकात्मक कुश्ती हुई। कुछ देर तक चले इस मल्ल युद्ध के बाद दोनों पहलवान बराबरी पर कुश्ती छोड़कर एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए गले मिले। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने जमकर जयकारे लगाए। ब्रज की पुरानी परंपराओं से जुड़े इस आयोजन ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।

‘नंद के जमाई की जय’ और ‘बृषभानु के जमाई की जय’ से गूंजा नंदगांव

बरसाना से आए गोप जहां नंदबाबा के जमाई की जय के उद्घोष कर रहे थे, वहीं नंदगांव के लोग बृषभानु के जमाई की जय बोलते नजर आए। दोनों पक्षों के बीच यह पारंपरिक हंसी-मजाक और जयकारों का दौर काफी देर तक चलता रहा। इस दौरान नंदगांव और बरसाना की आपसी सांस्कृतिक रिश्तेदारी और ब्रज की लोक परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली। श्रद्धालु भी इस माहौल का आनंद लेते रहे और जयकारों में शामिल होते रहे।

15 फीट ऊंचे बांस पर चढ़ा भांड स्वरूप

नंदोत्सव के दौरान भांड स्वरूप एक गोस्वामी युवक करीब 15 फीट ऊंचे बांस पर चढ़ गया। युवक के बांस पर चढ़ते ही वहां मौजूद लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। पारंपरिक आयोजन के इस दृश्य ने लोगों को खूब आकर्षित किया। ब्रज के धार्मिक आयोजनों में ऐसे लोक और सांस्कृतिक स्वरूप सदियों से उत्सव का हिस्सा रहे हैं। नंदोत्सव में भी इन परंपराओं को उसी उत्साह के साथ निभाया गया, जिससे नई पीढ़ी को ब्रज की पुरानी संस्कृति से जोड़ने का काम होता है।

तीन घंटे तक चलता रहा समाज गायन

जगमोहन में बरसाना और नंदगांव के गोस्वामी समाज के लोगों का संयुक्त समाज गायन करीब तीन घंटे तक चला। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े पद, बधाई गीत और ब्रज की पारंपरिक गायन शैली सुनाई गई। गायन के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना रहा। कई श्रद्धालु भक्ति में झूमते और नृत्य करते नजर आए। पूरा नंदगांव इस दौरान कृष्ण भक्ति में डूबा हुआ दिखाई दिया।

ब्रज की संस्कृति और कृष्ण भक्ति का संगम

नंदोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रज की सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी है। नंदगांव में होने वाले इस आयोजन में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी लीलाओं को गीत, संगीत, मल्ल युद्ध और पारंपरिक रस्मों के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। रविवार को भी नंदभवन में कुछ ऐसा ही नजारा रहा। श्रद्धालुओं के जयकारों, समाज गायन, पारंपरिक वेशभूषा और उत्सवी माहौल ने पूरे नंदगांव को कृष्णमय कर दिया।

लाला के दर्शन के लिए पहुंचीं गोपियों से लेकर बरसाना से आए गोपों तक, हर कोई नंदोत्सव के रंग में रंगा नजर आया। नंद के आंगन में मनाए गए इस उत्सव ने एक बार फिर दिखाया कि ब्रज में कृष्ण सिर्फ आराध्य नहीं, बल्कि लोगों के अपने ‘लाला’ हैं। यही अपनापन नंदोत्सव को बाकी आयोजनों से अलग और खास बनाता है।

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