मुजफ्फरनगर: खतौली इलाके में डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत के मामले में अदालत ने बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी रिश्तेदार (मामा) पिंकू उर्फ टिंकू को आखिरी सांस तक जेल में रहने (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इस केस में सबसे खास बात यह रही कि अदालत ने महज 134 दिनों के भीतर और आरोप तय होने के सिर्फ 21 दिन के अंदर इंसाफ देकर एक मिसाल कायम की है।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना खतौली थाना क्षेत्र के एक गांव की है। मीरापुर की रहने वाली एक महिला अपनी डेढ़ साल की मासूम बच्ची को लेकर अपने भाई पिंकू के घर आई हुई थी। किसे पता था कि जिस घर को बच्ची के लिए सबसे सुरक्षित माना जा रहा था, वहीं उसके साथ इतनी बड़ी दरिंदगी हो जाएगी। आरोपी मामा पिंकू उर्फ टिंकू बच्ची को बिस्किट दिलाने के बहाने बाहर ले गया।

इसके बाद उसने अपनी ही नन्हीं सी भांजी के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। जब बच्ची की हालत बिगड़ी और परिजनों को मामले का पता चला, तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को फौरन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

त्वरित जांच और कोर्ट का त्वरित फैसला
केस की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने इसमें बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरती। 3 महीने के भीतर जांच: पुलिस ने सभी सबूत जुटाकर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। 21 दिन में सुनवाई पूरी: कोर्ट में चार्ज फ्रेम होने के महज 21 दिन के अंदर गवाहियों और सबूतों के आधार पर फैसला सुना दिया गया। अपर सत्र न्यायालय (विशेष पॉक्सो कोर्ट) के जज मनोज कुमार सिद्धू ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और साथ ही जुर्माना भी लगाया।

फैसले के दौरान जज साहब ने क्या कहा?
फैसला सुनाते वक्त जज मनोज कुमार सिद्धू काफी भावुक और गंभीर नजर आए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जिस तरह से रिश्तों की मर्यादा टूट रही है, वह बेहद चिंताजनक है। “मानवीय रिश्तों और नैतिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए आज समाज को अंदर से बदलने और सोचने की जरूरत है। अच्छे विचार, सत्संग और अच्छी किताबें ही इंसान को सही रास्ते पर रख सकती हैं। इसके अलावा हमारी पढ़ाई-लिखाई में भी बच्चों को बचपन से ही सही नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी में अच्छे संस्कार ढल सकें।”

पीड़ित परिवार ने कोर्ट के इस त्वरित और कड़े फैसले पर राहत की सांस ली है। इलाके के लोगों का भी कहना है कि ऐसे मामलों में जब इतनी जल्दी सजा मिलती है, तो समाज में अपराधियों के अंदर कानून का खौफ पैदा होता है।

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