उत्तर प्रदेश (UP) के मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना पुलिस ने एक अंतरराज्यीय नकली नोट तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह काफी समय से बाजार में नकली नोट खपाने का काम कर रहा था। पुलिस ने इन तस्करों के पास से एक लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह के तार बेंगलुरु से लेकर पाकिस्तान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं।
बुढ़ाना पुलिस की बड़ी कामयाबी
मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग कार में सवार होकर नकली नोटों की बड़ी खेप लेकर जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की। जब पुलिस ने वैगनआर कार को रोकने की कोशिश की, तो तस्करों ने गाड़ी भगाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी के चलते उन्हें खतौली रोड के पास दबोच लिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सालिम, माजिद और जीशान के रूप में हुई है, जिसमें सालिम एक जनसेवा केंद्र संचालित करता है।
बेंगलुरु से मंगवाते थे नकली नोट
जांच में सामने आया है कि ये आरोपी बेंगलुरु में बैठे माइकल फर्नांडीज नाम के व्यक्ति से कोरियर के जरिए नकली नोट मंगवाते थे। इनका काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये कोरियर कंपनी को फर्जी नाम और पते देते थे और माइकल द्वारा भेजे गए एक सीक्रेट कोड के जरिए खेप रिसीव करते थे। ये लोग मवाना के दो अन्य साथियों (साहिल और शहनवाज) के जरिए 30 से 40 हजार रुपये में एक लाख रुपये के नकली नोट मंगाते थे। इसके बाद, ये बाजारों में घूम-घूमकर 50 प्रतिशत कमीशन के लालच में इन नकली नोटों को असली नोटों के साथ खपा देते थे।
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पाकिस्तान कनेक्शन की जांच
गिरोह के सदस्य माजिद के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। साल 2022 में वह दुबई में मजदूरी करने गया था, जहाँ उसका संपर्क कुछ पाकिस्तानी नागरिकों से हुआ था। इस संबंध के सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर गहन जांच कर रही है कि क्या इन नोटों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है या यह किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब तक खपा चुके हैं लाखों की करेंसी
पूछताछ में पता चला कि जनसेवा केंद्र संचालक सालिम इस गिरोह का सरगना है। वह पिछले दो सालों से इस काले धंधे में लिप्त था। अभी तक वह छह से ज्यादा बार नकली नोटों की खेप मंगवा चुका है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह गिरोह अब तक बाजार में पांच से सात लाख रुपये के नकली नोट चला चुका है। पुलिस की एक टीम बेंगलुरु भेजी गई है ताकि मुख्य सप्लायर माइकल और गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ा जा सके।
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खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) भी सक्रिय हो गई है। पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि बेंगलुरु में नोट छापे जा रहे हैं या विदेश से मंगवाए जा रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा है। मुख्य आरोपियों के पकड़े जाने के बाद ही इस पूरे नेक्सस का सही स्तर पता चल पाएगा।
नकली नोट की पहचान कैसे करें?
पुलिस ने बताया कि गिरोह द्वारा छापे गए नोटों में वाटरमार्क और अन्य सुरक्षा फीचर्स को इतनी सफाई से बनाया गया है कि पहली नजर में धोखा खाना आसान है। हालांकि, इसमें एक बारीक अंतर है—नोट पर छपे 500 रुपये के अंक का रंग सामान्य असली नोट की तरह नहीं बदलता है। आम जनता से अपील की गई है कि वे लेनदेन करते समय विशेष सावधानी बरतें। यदि आपको किसी नोट पर संदेह हो, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
रिपोर्ट-सोनू सिंह @Nation27


