पीलीभीत: जिले में प्रस्तावित लेपर्ड सफारी पार्क को लेकर अब इंतजार खत्म होता नजर आ रहा है। गोपालपुर वनक्षेत्र में बनने वाली इस सफारी के लिए शासन ने शुरुआती काम और शिलान्यास की तैयारियों के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। बजट मिलने के बाद वन विभाग ने सफारी क्षेत्र में जरूरी विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर तैयारियां तय समय के मुताबिक चलती रहीं तो अगले महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेपर्ड सफारी का शिलान्यास कर सकते हैं।
गोपालपुर वनक्षेत्र में प्रस्तावित लेपर्ड सफारी को पीलीभीत के पर्यटन और वन्यजीव क्षेत्र के लिए एक बड़ी परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। शासन से जारी रकम का इस्तेमाल शुरुआती स्तर पर सफारी क्षेत्र को विकसित करने और जरूरी व्यवस्थाएं तैयार करने में किया जाएगा। वन विभाग की ओर से क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधा, सफारी से जुड़ी आधारभूत व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी कामों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। बजट जारी होने के बाद इस परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ जंगल के भीतर वन्यजीवों के बीच जगह और संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। ऐसे में तेंदुए जंगल के दूसरे हिस्सों में सुरक्षित और शांत ठिकाने तलाश रहे हैं। इसी बदलाव के बीच दियोरिया रेंज और शाहजहांपुर जिले की खुटार रेंज के सामाजिक वानिकी क्षेत्र तेंदुओं के लिए पसंदीदा इलाकों के रूप में सामने आए हैं। इन वन क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी लगातार देखी जा रही है। घना जंगल, पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन और अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण इनके लिए बेहतर वास स्थल तैयार कर रहा है।
पीलीभीत पहले से ही टाइगर रिजर्व और अपने प्राकृतिक जंगलों के कारण वन्यजीव प्रेमियों के बीच खास पहचान रखता है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक बाघों और दूसरे जंगली जानवरों को देखने पहुंचते हैं। ऐसे में लेपर्ड सफारी शुरू होने से जिले के पर्यटन को एक नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है। सफारी विकसित होने के बाद पर्यटकों को तेंदुओं को उनके प्राकृतिक वातावरण के करीब से देखने का अवसर मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। होटल, होमस्टे, स्थानीय गाइड, वाहन संचालक और छोटे कारोबार इससे जुड़कर रोजगार के नए अवसर हासिल कर सकते हैं।
लेपर्ड सफारी का मकसद सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है। तेंदुओं के लिए सुरक्षित क्षेत्र तैयार करना भी इस योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पीलीभीत और आसपास के जंगलों में तेंदुओं की मौजूदगी बढ़ने के साथ उनके संरक्षण और सुरक्षित आवास की जरूरत भी बढ़ी है। गोपालपुर वनक्षेत्र में सफारी विकसित होने के बाद तेंदुओं के संरक्षण, निगरानी और पर्यटकों के बीच वन्यजीवों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
शासन से बजट जारी होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर सफारी के शिलान्यास पर है। विभागीय स्तर पर तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि अक्टूबर 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास कर सकते हैं। अगर परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में पीलीभीत की पहचान सिर्फ टाइगर रिजर्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां लेपर्ड सफारी भी वन्यजीव पर्यटन का नया केंद्र बन सकती है।


