अब तक आपने फिल्मों में देखा होगा कि जालसाज बड़े बड़े सरकारी भवनों यहां तक कि ताज़ महल तक को बेच रहे है। उत्तर प्रदेश के जालसाजों की करामात भी कुछ कम नहीं है। प्रयागराज में जालसाजों ने पूरा पहाड़ ही बेच दिया। मामला खुलने के बाद पूरे प्रयागराज में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रयागराज की बारा तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीनों की बंदरबांट और जालसाजी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां भूमाफियाओं ने राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक खाते ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से अपने नाम कराकर बेच डाला। मामला उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है। क्षेत्र के लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने एक निजी कंपनी के निदेशक सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ लालापुर थाने में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है।
पूरा मामला बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है। यहां स्थित आराजी संख्या-01, रकबा 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.163 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि जालसाजों ने भ्रष्टाचार का सहारा लेकर इस बेशकीमती जमीन को फर्जी ढंग से अपने नाम (खाते) में दर्ज करा लिया और फिर इसकी धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त की गई।
जब प्रशासन को इस बड़े घोटाले की भनक लगी, तो जांच बैठाई गई। जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद संबंधित खाताधारकों के नाम तुरंत निरस्त कर दिए गए और जमीन को वापस सरकारी (सार्वजनिक) खाते में दर्ज किया गया। लेखपाल प्राची सिंह परिहार की तहरीर पर लालापुर पुलिस ने 19 लोगों को नामजद करते हुए गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपियों में पूर्व खाताधारक, जमीन के खरीदार और एक निजी कंपनी शामिल है।
एफआईआर में एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक समेत राजनाथ, बृजेश नाथ, उमेश नाथ, रेखा तिवारी, कमलेश तिवारी, रत्नेश तिवारी, प्रभात कुमार, रामदेव, सुखदेव, जयदेव, जगदेव, सचिन, पीयूष, अनीता, नीरज कुशवाहा, आनंद कुमार मिश्रा, पूनम आनंद मिश्रा का नाम शामिल है। पुलिस का कहना है कि मामले की एफआईआर दर्ज कर गहन विवेचना शुरू कर दी गई है। राजस्व अभिलेखों, भूमि हस्तांतरण और अन्य संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

