सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को मानने वाले व्यक्ति के लिए दूसरे धर्मों का सम्मान करना भी जरूरी है।

अखिलेश ने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे खुद को सच्चा सनातनी कैसे कह सकते हैं? अखिलेश यादव ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन की ओर से इसे अवैध निर्माण बताया गया है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर मुस्लिम पक्ष और विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला अदालत तक पहुंचा और जिला जज के आदेश के बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के लिए जेसीबी और अन्य मशीनरी को मौके पर लाया गया। सुरक्षा के लिहाज से बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी परिसर में बिना वैध अनुमति के बने निर्माण को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश और नियमानुसार की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

अखिलेश बोले- धर्म के नाम पर नफरत ठीक नहीं

अखिलेश यादव ने अपने बयान में धर्म और आस्था के नाम पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि सनातन परंपरा का मूल विचार सभी के सम्मान और सह-अस्तित्व से जुड़ा है। ऐसे में किसी दूसरे धर्म के प्रति सम्मान नहीं रखने वाले व्यक्ति को सच्चा सनातनी कहना उचित नहीं है। सपा अध्यक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि धर्म और आस्था लोगों को जोड़ने का काम करते हैं, लेकिन यदि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक विवाद में बदल दिया जाए तो समाज में तनाव बढ़ सकता है।

सांसद इकरा हसन को भी रोके जाने पर सियासत तेज

इस पूरे मामले के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोके जाने की खबर ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। बताया गया कि उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया गया था। इकरा हसन सहारनपुर पहुंचकर मस्जिद प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों से मुलाकात करना चाहती थीं। सपा नेताओं ने सांसद को रोके जाने पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा है। पार्टी का कहना है कि जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनने और मौके पर जाने से रोकना उचित नहीं है।

प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई

मस्जिद के ढांचे को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर निगरानी रखी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। आसपास के क्षेत्र में भी पुलिस बल की तैनाती की गई। प्रशासन की कोशिश है कि अदालत के आदेश के तहत कार्रवाई पूरी कराई जाए और कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं, राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों के बयानों के कारण मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

मामला सिर्फ निर्माण का नहीं, राजनीति का भी बना मुद्दा

सहारनपुर की यह कार्रवाई अब केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रह गई है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां प्रशासन इसे कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार की कार्रवाई और उसके तरीके पर सवाल उठा रहा है। अखिलेश यादव के बयान के बाद यह विवाद और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर सपा और भाजपा के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल प्रशासन की ओर से अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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