आस्था की कठिन डगर: काँवर पर शरीर टिकाकर यात्रा
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में इन दिनों शिवभक्ति का एक ऐसा स्वरूप देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। अनमोल मिश्रा नामक एक शिवभक्त ने सावन के पावन महीने में अपनी आस्था को एक नई ऊँचाई दी है। वे सामान्य काँवरिया नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्वी की तरह नुकीली काँवर पर अपना शरीर टिकाकर लंबी यात्रा तय कर रहे हैं। उनकी इस कठोर तपस्या को देखकर राहगीर भी नतमस्तक हो रहे हैं और भोलेनाथ की अपार शक्ति को नमन कर रहे हैं।
यात्रा का संकल्प: माता-पिता के प्रति समर्पण
अनमोल मिश्रा की यह यात्रा मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही भावुक और नेक उद्देश्य छिपा है। अनमोल ने बताया कि उनका यह कठिन सफर अपने माता-पिता के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और पूरे परिवार की खुशहाली के लिए है। वे अपने परिजनों की दीर्घायु की कामना लेकर फर्रुखाबाद के पवित्र पंचाल घाट से गंगाजल लेकर निकले हैं। उनका लक्ष्य शाहजहांपुर के निगोही स्थित प्रसिद्ध लीलाधर नीलकंठ बाबा मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करना है।
150 किलोमीटर का सफर और अटूट जज्बा
यह यात्रा कुल 150 किलोमीटर की है, जिसे पूरा करने के लिए अनमोल मिश्रा ने अद्भुत धैर्य का परिचय दिया है। उन्हें घर से निकले हुए 11 दिन हो चुके हैं और अभी भी लगभग 21 से 22 दिन का लंबा सफर तय करना बाकी है। नुकीली काँवर पर शरीर का भार रखकर चलना सामान्य नहीं है, लेकिन अनमोल का मानना है कि उनकी भक्ति और भोलेनाथ की कृपा ही उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दे रही है। थकान और शारीरिक पीड़ा के बावजूद उनके कदमों में कोई कमी नहीं आई है।
भोलेनाथ की कृपा का अनुभव
अनमोल मिश्रा का कहना है कि भगवान शिव की कृपा से अब तक उन्हें अपनी इस कठिन यात्रा के दौरान कोई विशेष परेशानी नहीं हुई है। वे कहते हैं, “जब मन में अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है।” उनकी यह अनोखी काँवर यात्रा जहाँ भी गुजरती है, वहां लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं। उनके जज्बे को देखकर श्रद्धालुओं के मन में शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव और गहरा हो जाता है।
श्रद्धालुओं के बीच बने आकर्षण का केंद्र
अनमोल की यह कठिन तपस्या वर्तमान समय में श्रद्धालुओं के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों के बीच उनकी भक्ति की प्रशंसा हो रही है। लोग उनकी यात्रा को साक्षात तपस्या मान रहे हैं। एक युवा का अपने बुजुर्ग माता-पिता के प्रति ऐसा समर्पण आज के दौर में न केवल सराहनीय है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा भी है। अनमोल की यात्रा यह सिखाती है कि यदि हृदय में सच्ची निष्ठा हो, तो कठिन से कठिन तप भी संभव है।
मंदिर पहुँचने की प्रतीक्षा
अब क्षेत्रवासियों और अनमोल के परिवार को उस पल का इंतजार है जब वे निगोही के लीलाधर नीलकंठ बाबा के दरबार में पहुँचकर गंगाजल अर्पित करेंगे। अनमोल की इस भक्ति को देखकर मंदिर परिसर में भी भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है। लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि अनमोल की यह कठिन तपस्या सफल हो और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। शिवभक्तों के इस अद्भुत समर्पण का साक्षी बनना हर किसी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है।


