Uttarpradeshnews : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शिलांग में आयोजित उत्तर पूर्वी परिषद की 73वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में पर्यटन, कृषि, निवेश, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे जैसे पूर्वोत्तर के विकास से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही, बैठक में विजन 2047 को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 जून को शिलांग में उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के 73वें पूर्ण अधिवेशन की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, पर्यटन, कृषि, बागवानी और निवेश को प्रोत्साहन देने जैसे विषयों पर विशेष रूप से विचार किया जाएगा।
विभिन्न क्षेत्रों में विकास को लेकर होगी चर्चा
आज हुई पूर्व-पूर्ण अधिवेशन बैठक में बांस, अगरवुड, अष्टलक्ष्मी दर्शन और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। गुरुवार को होने वाले पूर्ण अधिवेशन में विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए गठित मुख्यमंत्रियों की उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की अब तक की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।बैठक में पर्यटन, कृषि और बागवानी के साथ-साथ निवेश को बढ़ावा देने पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसके अलावा दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने, खेलों को प्रोत्साहन देने और आर्थिक गलियारों के विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। साथ ही बुनियादी ढांचे, बेहतर कनेक्टिविटी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
विकास परियोजनाओं की प्रगति की होगी समीक्षा
बैठक में पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय (डोनर) की प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की भी समीक्षा की जाएगी। इसमें नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट और बैंकर्स कॉन्क्लेव के परिणामों पर चर्चा होगी। युवा विकास, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान वाली परियोजनाओं (यूएसपी) की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। बैठक में नॉर्थ ईस्ट विजन प्लान 2047 पर भी विचार किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक पूर्वोत्तर क्षेत्र को आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, नवाचार, स्थिरता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमुख केंद्र बनाना है।
पूर्वोत्तर परिषद बैठक में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई नेता होंगे शामिल
इस बैठक में केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास मंत्री और एनईसी के उपाध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ-साथ पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे। उत्तर पूर्वी परिषद की स्थापना वर्ष 1971 में उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम के तहत की गई थी। यह संस्था पूर्वोत्तर क्षेत्र की सर्वोच्च क्षेत्रीय योजना इकाई है, जो इस क्षेत्र के समग्र और समन्वित विकास में अहम भूमिका निभाती है।

