उत्तराखंड के चमोली जनपद में 10 स्कूल बंद। नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के बढ़ते आतंक को देखते हुए प्रशासन ने एक अहम और सख्त फैसला लिया है। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए क्षेत्र के दस विद्यालयों में 20 अगस्त 2026 से 23 अगस्त 2026 तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। यह आदेश जिलाधिकारी चमोली के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है।
प्रमुख, क्षेत्र पंचायत के पत्र के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय
यह पूरा मामला तब सामने आया जब प्रमुख, क्षेत्र पंचायत नारायणबगड़ ने जनपद चमोली को पत्र संख्या 90, दिनांक 19 अगस्त 2026 के माध्यम से नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों से उत्पन्न भय की स्थिति से अवगत कराया था। पत्र में बताया गया कि क्षेत्र में कुत्तों का आतंक इतना अधिक बढ़ गया है कि आम नागरिकों और खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी चमोली ने संबंधित अधिकारियों को 10 स्कूलों में अवकाश घोषित करने के आवश्यक निर्देश जारी किए है। किन विद्यालयों में रहेगा अवकाश?
छात्र हित को ध्यान में रखते हुए नारायणबगड़ क्षेत्र के निम्नलिखित दस विद्यालयों में यह अवकाश प्रभावी रहेगा:
- राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज, नारायणबगड़
- राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, नारायणबगड़
- सरस्वती शिशु मंदिर, नारायणबगड़
- उत्तरांचल विद्या निकेतन, नारायणबगड़
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नारायणबगड़
- श्री गुरुराम राय पब्लिक स्कूल, पंती
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नलगांव
- राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नलगांव
- मॉडर्न चिल्ड्रन एकेडमी, नारायणबगड़
- उत्तराखण्ड विद्यालय निकेतन, नारायणबगड़
ऑनलाइन माध्यम से जारी रहेगी पढ़ाई
अवकाश की इस अवधि के दौरान बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित विद्यालयों के अध्यापक ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य सुनिश्चित कराएंगे। इस फैसले से यह जाहिर होता है कि प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को सुरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखना भी है। यह आदेश विकासखंड शिक्षा अधिकारी/उप शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), नारायणबगड़ के माध्यम से जारी किया गया है।
उत्तराखंड में शायद दूसरी बार ऐसा फैसला
बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के इतिहास में यह पहली बार है जब कुत्तों के आतंक के कारण स्कूलों को बंद करने जैसा कदम उठाया गया हो। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी, जहां आवारा कुत्तों के हमलों के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनज़र इसी तरह का निर्णय लिया गया था। यह तुलना यह दर्शाती है कि आवारा पशुओं, विशेषकर कुत्तों की समस्या अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में भी गंभीर रूप ले चुकी है।
आवारा कुत्तों की समस्या: एक बढ़ता हुआ खतरा
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में आवारा और हिंसक कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटिंग की कमी, कचरा प्रबंधन की अव्यवस्था और कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन न होने जैसे कारणों से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे, जो अक्सर पैदल या अकेले सफर करते हैं, इस खतरे के सबसे अधिक शिकार बनते हैं। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सक्रियता से यह मामला सामने आना और समय रहते कार्रवाई होना सराहनीय कदम माना जा रहा है।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
प्रशासन के इस फैसले पर स्थानीय अभिभावकों ने राहत की सांस ली है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है। उनकी मांग है कि प्रशासन को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए स्थायी और दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में बार-बार स्कूल बंद करने की नौबत न आए। स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि पशु कल्याण विभाग और नगर निकायों को मिलकर इस समस्या पर ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए।
सोनू सिंह @Nation27
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