केंद्र सरकार ने देश को समय निर्धारण के क्षेत्र में स्वदेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने ‘व्हाइट रैबिट’ नामक अत्याधुनिक सटीक समय निर्धारण तकनीक पर आधारित एक डेमो नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह नेटवर्क पूरे भारत में नैनोसेकंड से भी कम समय के भीतर बिल्कुल सटीक समय प्रदान करेगा, जिससे वित्त, दूरसंचार, रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विदेशी GPS पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।
क्या है व्हाइट रैबिट तकनीक?
‘व्हाइट रैबिट’ एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसका मुख्य उद्देश्य हजारों जुड़े उपकरणों के बीच नैनोसेकंड से भी कम समय में सटीक तालमेल स्थापित करना है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे बेंगलुरु स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरी (RRSL) में शुरू किया। यह परियोजना उपभोक्ता मामले विभाग, CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की संयुक्त पहल है। GPS
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
मंत्रालय के अनुसार, यह सिस्टम ‘प्रिसिजन टाइम प्रोटोकॉल’ आधारित व्हाइट रैबिट तकनीक के जरिए भारतीय मानक समय (IST) का प्रसार करता है, जो सीधे राष्ट्रीय समय निर्धारण संस्था UTC (NPLI) से जुड़ा है। इस तकनीक के माध्यम से बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली ग्रिड, परिवहन और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक सटीक समय का समन्वय संभव होगा, जिससे देश में स्वदेशी और विश्वसनीय समय व्यवस्था स्थापित हो सकेगी। GPS
सफल रहा सत्यापन परीक्षण
मंत्रालय ने जानकारी दी है कि CSIR-NPL के साथ मिलकर, उपभोक्ता मामले विभाग, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), NSE और BSNL ने बेंगलुरु प्रयोगशाला और चेन्नई स्थित NSE की इकाई के बीच सुरक्षित समय प्रसारण का सत्यापन परीक्षण भी सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है।
इससे पहले 16 जुलाई को मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘एक देश, एक समय’ योजना के तहत भारतीय मानक समय प्रसार परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए इसरो के बेंगलुरु मुख्यालय का दौरा भी किया था।इस कदम से देश में स्वदेशी समय निर्धारण की क्षमता मजबूत होगी और वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी साख बढ़ेगी। सरकार का यह प्रयास देश के तकनीकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। GPS

