उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए डबल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। अब प्रदेश के सभी मदरसे को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और उत्तराखंड बोर्ड दोनों से मान्यता लेनी होगी। लेकिन एक महीने बाद भी सिर्फ एक फीसदी मदरसों ने ही ये प्रक्रिया पूरी की है।
राज्य सरकार ने एक जुलाई को मदरसा बोर्ड खत्म कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। मकसद था अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना। लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रगति बहुत धीमी है। राज्य के कुल 452 मदरसों में से अब तक सिर्फ 7 मदरसों को ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की मान्यता मिल पाई है।
देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मदरसों ने मान्यता लेने से साफ इंकार कर दिया है। कुछ ने जांच टीम को कोई सूचना भी नहीं दी। अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सभी मदरसा संचालकों को रजिस्ट्रेशन के निर्देश दिए गए हैं। चेतावनी है कि यदि रजिस्ट्रेशन नहीं होता है तो उन मदरसों को बंद कर दिया जाएगा और वहां पढ़ने वाले बच्चों को पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा।
इस फैसले के बाद कई मदरसा संचालक अभी भी ऊहापोह की स्थिति में हैं। कुछ संचालकों ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट की शरण भी ली है। हालांकि सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और प्रशासनिक स्तर पर जांच पड़ताल भी शुरू हो गई है।

