राजधानी दिल्ली इन दिनों ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सज-धज कर तैयार है। इस बीच सामने आई जानकारी ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर भारत आने वाले हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस दौरे में भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी सीधी मुलाकात भी तय मानी जा रही है, जिसे दोनों देशों के आपसी रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम कदम बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, बीजिंग में मौजूद चीन का विदेश मंत्रालय इस दौरे से जुड़ा औपचारिक ऐलान जल्द ही कर सकता है। संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रपति शी शनिवार को दोपहर के आसपास दिल्ली पहुंचेंगे, और शाम होते-होते भारत मंडपम में पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक हो सकती है।
गौर करने वाली बात यह है कि शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। उसके बाद 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प ने दोनों मुल्कों के रिश्तों में गहरी दरार डाल दी थी। ऐसे में यह मुलाकात उस घटना के बाद भारतीय जमीन पर होने वाली पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि इससे पहले दोनों नेता किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान एक ही मंच पर आए थे, लेकिन वहां सिर्फ औपचारिक अभिवादन तक ही बात सीमित रही थी, कोई गंभीर बातचीत नहीं हो पाई थी।
अब स्थितियां कुछ अलग दिख रही हैं। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहा यह सम्मेलन मोदी और शी दोनों के लिए यह जांचने का एक मौका बन सकता है कि पिछले कुछ समय में आई थोड़ी-बहुत नरमी आगे बढ़ने के लायक है भी या नहीं।
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इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रियता बढ़ी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हाल ही में उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए चीन गए थे, जिसे दोनों देशों के बीच संवाद की कड़ी बनाए रखने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि प्रस्तावित बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार-निवेश और आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे केंद्र में रह सकते हैं।

