चार बार बनी मुख्यमंत्री
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती चार बार यूपी की सत्ता के शीर्ष पर बैठ चुकी हैं। अंतिम बार 2007 में उनकी सरकार बनी थी। तब से अब तक मायावती किसी चुनाव में कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई है। मायावती सत्ता के सूखे को समाप्त करने में नाकाम साबित हुई है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे पारिवारिक कलह भी रही है। मायावती ने अपनी दूरदर्शिता के दम पर कांशीराम की विरासत को आगे बढ़ाया। प्रदेश की जनता ने बसपा की नीतियों पर विश्वास दिखाते हुए चार बार प्रदेश की कमान मायावती को सौंपी। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव है। पिछले कुछ समय से बसपा अपने उत्तराधिकारी की तलाश में जुटी है।

अब तक क्या हुआ
आकाश आनंद के साथ मायावती का रिश्ता शुरू से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दिसंबर 2023 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पार्टी नेताओं की बैठक में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिसके बाद बसपा में उनका कद काफी बढ़ गया था। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान विवादित बयानों के बाद 7 मई 2024 को मायावती ने उनसे उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय समन्वयक सहित सभी बड़ी जिम्मेदारियां वापस ले लीं। इसके बाद भी यह चक्र चलता रहा जून 2024 में उन्हें दोबारा दोनों जिम्मेदारियां सौंपी गईं, मार्च 2025 में मायावती ने उन्हें सभी पदों से हटाने के बाद पार्टी से भी निष्कासित कर दिया, और सार्वजनिक माफी के बाद मई 2025 में उन्हें फिर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई।

3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया, और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी से पूरी तरह बाहर करने का फैसला बसपा के लिए एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जा रहा है। इस फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने X प्रोफाइल पर अपनी पहचान बदलकर खुद को सिर्फ बसपा कार्यकर्ता बताया है, जिससे उनके समर्थकों में निराशा है।

प्लान बी: ईशान आनंद?
चर्चा तेज़ है कि मायावती अब छोटे भतीजे की ओर देख रही हैं। आकाश को पार्टी में शामिल करने और फिर हटाने के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यह महज संयोग है या सोचा-समझा प्रयोग। हालांकि विश्लेषक इसे अभी पक्का उत्तराधिकार नहीं मान रहे। सितंबर 2026 की स्थिति में ईशान आनंद को आकाश का पूर्ण प्रतिस्थापन नहीं माना जा सकता। अभी वे केवल संभावित विकल्प हैं, उत्तराधिकारी नहीं। साथ ही आकाश के राजनीतिक भविष्य को भी समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि मायावती उन्हें पहले भी कई बार हटाकर वापस ला चुकी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नए सिरे से अपनी छवि और नेतृत्व को व्यवस्थित करने की कोशिश में दिख रही है। लेकिन जिस तरह पिछले तीन वर्षों में आकाश को कई बार हटाया और फिर बहाल किया गया, उसे देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह फैसला अंतिम है या मायावती की उस पुरानी रणनीति का ही एक और दौर, जिसमें वे अपने उत्तराधिकारी को बार-बार परखती रही हैं।

रिपोर्ट- सोनू सिंह

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