CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। प्रदेश में खनन क्षेत्रों की निगरानी के लिए ‘एकीकृत खनन निगरानी तंत्र’ (Integrated Mining Surveillance System – IMSS) को न केवल लागू किया गया है, बल्कि इसे अत्यधिक उन्नत और प्रभावी बनाया गया है। इस आधुनिक प्रणाली ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाकर राजस्व संरक्षण के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
आईएमएसएस (IMSS) और तकनीक का कमाल
भूतत्व एवं खनन विभाग द्वारा संचालित यह निगरानी प्रणाली 24×7 काम कर रही है। इस तंत्र के जरिए खनन क्षेत्रों, भंडारण स्थलों और खनिजों को ढोने वाले वाहनों की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी की जा रही है। आईएमएसएस में हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन सर्विलांस और जीपीएस ट्रैकिंग का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक ने मानवीय हस्तक्षेप को कम करके पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है, जिससे ‘खनन माफियाओं’ के लिए छिपकर काम करना अब लगभग असंभव हो गया है। CM Yogi
राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि
अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने का सीधा सकारात्मक असर राज्य के राजस्व पर पड़ा है। सरकार की इस सख्ती और तकनीक के सफल एकीकरण के कारण भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को 756 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। यह राशि न केवल सरकार की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अब पूरी तरह से वैध और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। प्राप्त यह अतिरिक्त धनराशि अब राज्य के विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं में खर्च की जा रही है। CM Yogi

पारदर्शिता और जवाबदेही
इस व्यवस्था के लागू होने से खनन पट्टेदारों (Lessees) की जवाबदेही बढ़ी है। पहले जहाँ खनन के आंकड़ों में हेरफेर की संभावना बनी रहती थी, वहीं अब ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल मॉनिटरिंग के कारण हर टन खनिज का हिसाब-किताब सरकार की नजरों के सामने है। विभाग द्वारा अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, जिससे खनन क्षेत्र में अनुशासन लौटा है। स्थानीय निवासियों का भी मानना है कि अब नदियों और संरक्षित क्षेत्रों में मनमानी ढंग से रेत और मौरंग का खनन पहले की अपेक्षा काफी कम हुआ है। CM Yogi
योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत, आईएमएसएस को प्रदेश के हर जिले में सक्रिय किया गया है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे तकनीक से मिले डेटा का तुरंत विश्लेषण करें और यदि कहीं भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो वहां फौरन छापेमारी करें। विभाग ने खनन के लिए ‘ई-रवन्ना’ (e-Ravanna) व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है, जिससे बिना परमिट के एक भी वाहन का आवागमन मुमकिन नहीं रहा है। CM Yogi
भविष्य की राह और पर्यावरणीय सुरक्षा
खनन क्षेत्र में तकनीक का बढ़ता उपयोग न केवल राजस्व बढ़ा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। अंधाधुंध और अनियंत्रित खनन से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर बुरा असर पड़ता है। सरकार के इस एकीकृत तंत्र ने अवैध खनन पर लगाम लगाकर नदियों के किनारों को भी सुरक्षित किया है। भविष्य में सरकार इस प्रणाली को और अधिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) से जोड़ने की योजना बना रही है, ताकि सिस्टम खुद ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर अलर्ट जारी कर सके। CM Yogi
उत्तर प्रदेश सरकार का यह डिजिटल पहल मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन गया है। शासन, प्रशासन और आधुनिक तकनीक का यह अनूठा संगम भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। CM Yogi
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