यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा में भारी मतभेद दिखाई दे रहे है। बीते दिनों बसपा में एक बड़ा पारिवारिक ड्रामा देखने को मिला, जब मायावती ने भतीजे आकाश को पार्टी के “राष्ट्रीय संजोयक” पद से हटा दिया था। अब पार्टी सुप्रीमो ने अपने आकाश की पार्टी में प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर पूरी तरह से पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
3 सितंबर को लखनऊ में बसपा की अखिल भारतीय बैठक हुई जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती के परिवार का कलह खुलकर सामने आया था। बैठक में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि “अभी उन्हें परिपक्व होना बाकी है” जिसके बाद मायावती ने एक शर्त रखी थी कि आकाश आनंद के ससुर अशोक के राजनीतिक संन्यास लेने के बाद ही आकाश को पुन: जिम्मेदारी दी जाएगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद में आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का नाम आया था। बीते बुधवार को एक्स पोस्ट के माध्यम से अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति छोड़ने का ऐलान भी कर दिया था। किंतु मायावती ने इसे देर से लिया गया फैसला बताकर अस्वीकार कर दिया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर सिद्धार्थ ने यह कदम समय रहते उठा लिया होता तो आकाश को इतनी उठापटक नहीं झेलनी पड़ती। लेकिन देरी से लिए गए फैसले से नाराज मायावती ने आकाश आनंद को एक और झटका दिया है।
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों…— Mayawati (@Mayawati) September 10, 2026
मायावती ने X पर पोस्ट कर नाराजगी जतायी और उन्होंने आकाश आनंद पर आरोप लगाया कि वे पहले उनकी हर एक्स पोस्ट को रिपोस्ट किया करते थे, लेकिन जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को लेकर पोस्ट डाली, तो आकाश ने उसे नजरअंदाज कर दिया। मायावती के मुताबिक यही इस बात का सबूत है कि आकाश पार्टी और मूवमेंट से ज्यादा तवज्जो वे अपने पारिवारिक रिश्तों को दे रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जो शख्स “डबल माइंड” होकर काम करे, वो भला बीएसपी और मूवमेंट का हित कैसे कर सकता है?
मायावती ने अपने पोस्ट से यह भी साफ कर दिया कि जैसे 3 सितंबर को आकाश को बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, वैसे ही अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह आजाद कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं जब आकाश आनंद और मायावती के रिश्तों में इस तरह की खटास आई हो। मार्च 2025 में भी उन्हें सभी पदों से हटाकर पार्टी से निष्कासित किया गया था, जिसके बाद अप्रैल 2025 में उनकी वापसी हुई थी। अब चुनाव से ठीक पहले यह ताजा घटनाक्रम बीएसपी के भीतर उत्तराधिकार की लड़ाई को फिर सुर्खियों में ले आया है।
रिपोर्ट- सोनू सिंह

