लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा है। उन्होंने x पर पोस्ट के जरिए दो अहम मुद्दों पर बात की UPI की नई भुगतान व्यवस्था और सरकार की स्मार्ट स्कूल योजना। मायावती ने साफ तौर पर कहा कि UPI पर लगने वाला नया शुल्क आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा, जबकि स्मार्ट स्कूल जैसी योजनाओं का स्वागत करते हुए उन्होंने इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।
अपनी पोस्ट में मायावती ने कहा कि सरकार ने शुरुआत में डिजिटल लेनदेन यानी यूपीआई को खूब बढ़ावा दिया, लोगों को इसकी आदत डलवाई, लेकिन अब उसी सुविधा पर शुल्क लगाकर सरकार जनता से दोहरी वसूली कर रही है। उनके मुताबिक, यह कदम आम लोगों को देखते हुए एक तरह की मुनाफाखोरी वाली पूंजीवादी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहले मुफ्त लेनदेन का भरोसा देकर लोगों को नकद के बजाय डिजिटल भुगतान की तरफ मोड़ा गया, और अब उसी व्यवस्था पर शुल्क थोप दिया गया, जिससे आम जनता में स्वाभाविक रूप से नाराजगी और बेचैनी है। मायावती ने सरकार की स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना को एक अच्छी पहल बताया है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या प्रति स्कूल महज दो लाख रुपये के बजट में स्मार्ट क्लासरूम या स्मार्ट स्कूल की असली तस्वीर सामने आ पाएगी।
मायावती ने कहा कि इससे पहले स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना ज्यादा जरूरी है, तभी स्मार्ट स्कूल जैसी योजनाएं जमीन पर असर दिखा पाएंगी। मायावती के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह बयान आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों को सामने लाता है, जबकि सरकार के पक्ष से जुड़े लोग इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे सकते हैं। बहरहाल, यूपीआई शुल्क और शिक्षा बजट जैसे मुद्दे आम जनता से सीधे जुड़े होने के कारण आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की उम्मीद है।


