भारतीय जनता पार्टी के संगठन में हाल ही में हुए बड़े बदलावों के बाद अब सबकी नजरें केंद्र की मोदी सरकार पर टिक गई हैं। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस संभावित बदलाव में 17 नए और युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
अगले साल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में चुनाव होने हैं। केंद्र की भाजपा सरकार 27 और 29 के लोकसभा चुनावों को साधने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह देने जा रही है। कुछ पुराने चेहरों के स्थान पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है। चुनाव से ठीक पहले होनें वाले मंत्रिमंडल बदलाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व देखने को मिल सकता है।
सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को लेकर हो रही है, जिन्हें आने वाले फेरबदल में बड़ी जिम्मेदारी मिलने और कद बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के विभाग में भी बदलाव की अटकलें हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल मिश्रण नीति (E-20) को लेकर उठे विवाद के बाद उनके मंत्रालय पर फिर से विचार हो सकता है, हालांकि इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
चर्चाओं में जिन नामों का जिक्र बार-बार आ रहा है, उनमें जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, एचडी कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, ललन सिंह, प्रह्लाद जोशी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरेन रिजिजू, मनसुख मांडविया और जी किशन रेड्डी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ मंत्रियों का कामकाज घटाकर वह जिम्मेदारी नए और युवा नेताओं को सौंपी जा सकती है, ताकि संगठन में हुए बदलावों का असर सरकार के कामकाज में भी दिखे।
हालांकि गृह, रक्षा, विदेश और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों में किसी बदलाव की संभावना लगभग नहीं के बराबर मानी जा रही है। यानी अमित शाह, राजनाथ सिंह, एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण फिलहाल अपने मौजूदा पदों पर बने रह सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभावित कैबिनेट विस्तार सितंबर या अक्टूबर के महीने में कभी भी हो सकता है। इस फेरबदल के जरिए सरकार युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व और चुनावी राज्यों को साधने की कोशिश कर सकती है।
बहरहाल, इनमें से किसी भी बदलाव को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इन तमाम नामों और अटकलों को फिलहाल सियासी कयासबाजी के दायरे में ही रखा जाना चाहिए। असली तस्वीर सरकार की औपचारिक घोषणा के बाद ही साफ हो पाएगी।
रिपोर्ट- सोनू सिंह

