नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री और इस दशक के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार नरेंद्र मोदी (Modi) का आज 76 वां जन्मदिन है। बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता जहां उन्हें आधुनिक भारत का विश्वाकर्मा (17 सितंबर विश्वकर्मा पूजा) बताते हैं, वहीं विपक्ष उनकी गिनती देश के सबसे कमजोर प्रधानमंत्रियों में करता है।
हालांकि विपक्ष के इन आलोचनाओं के बाद भी पीएम मोदी को अगर भारतीय राजनीतिक का धुरंधर कहा जाए तो गलत नहीं होगा क्योंकि चुनावी राजनीति में आज तक कभी उनकी हार नहीं हुई है। 25 सालों से वो लगातार सत्ता में (पहले मुख्यमंत्री, अब प्रधानमंत्री) बने हुए हैं इसलिए उन्हें पॉलिटिक्स का Gen Z भी लोग कहते हैं।
नेहरू का तोड़ा रिकॉर्ड
पीएम मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड (सबसे लंबे समय तक पीएम पद) भी तोड़ चुके हैं। बीते 12 सालों के शासन काल में बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे बड़े साहसिक फैसले लिए जिसे देश ने कभी सलाम किया तो कुछ फैसलों के लिए देश की जनता और विपक्ष की तीखी आलोचना का शिकार भी उन्हें होना पड़ा।
कुछ ऐसे फैसले लिए जो देश के लिए अब तक असंभव माना जाता था तो कुछ निर्णय ऐसे भी हुए जिसको लेकर विरोध होने पर कदम पीछे भी खींचने पड़े. आइये एक बार उन फैसलों को देखते हैं।
UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट की नई क्रांति
यूपीआई से पेमेंट पर चार्ज लगाए जाने के फैसले को लेकर भले ही अभी आलोचना हो रही है लेकिन यूपीआई ने देश की डिजिटल पेमेंट में एक नई क्रांति को जन्म दिया है। भारत में यूपीआई (UPI-Unified Payments Interface) की आधिकारिक शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी की (NPCI) ने की थी।
इसके जरिए सब्जी वाले से लेकर फैक्ट्री के मालिक तक और नौकरीपेशा से लेकर दिहाड़ी मजदूर तक सबने फायदा उठाया। यूपीआई ने भारत में लेन-देन के तरीके को बदल दिया। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बना दिया।
पूरी दुनिया ने भारत के इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की और इसे अपने देश में लागू करने की कोशिश की। इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाता है।
GST: एक देश, एक टैक्स की व्यवस्था
साल 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद देश में टैक्स की दशकों पुरानी व्यवस्था को मोदी सरकार ने पूरी तरह बदल दिया और 2017 में जीएसटी ( यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को देश में लागू किया।
इससे देश के लोगों को अलग-अलग अप्रत्यक्ष करों से मुक्ति मिली और एक ही प्रणाली में जोड़ने की कोशिश की। इससे देश की बड़ी टैक्स सुधार पहलों में शामिल किया जाता है और टैक्स की पूरी व्यवस्था में पार्दशिता भी आई।
पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक
उरी में सेना के कैंप पर हमले के बाद साल 2016 में भारतीय सेना ने पहली बार (शांति काल में) सीमा पार जाकर (एलओसी) सर्जिकल स्ट्राइक की थी। आतंकियों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई में सेना की कैंप पर हुए हमले का बदला लिया गया था।
मोदी सरकार के इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ भारत की एग्रेसिव अप्रोच में आए बदलाव के तौर पर देखा गया था. इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के अंदर हमले किए।
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को किया खत्म
साल 2019 में मोदी सरकार ने एक और साहसिक फैसला लिया। आजादी के बाद से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्टिकल 370 से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव कर दिया जिससे जम्मू-कश्मीर के पास अपना अलग संविधान, अलग ध्वज और आंतरिक प्रशासन का प्रावधान खत्म हो गया।
इसे सरकार ने एक देश एक विधान से जुड़ा नियम बताया और जम्म-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया। वहां उपराज्यपाल की नियुक्ति कर दी। राज्य के बाहर के लोगों को भी जमीन खरीदने, संपत्ति बनाने और बसने का अधिकार मिला। देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण फैसला बना।
किसान सम्मान निधि की शुरुआत
भारत एक कृषि प्रधान देश हैं और देश के किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हालांकि इसके बाद भी अन्नदाता की आर्थिक हालत इस देश में सबसे खराब रही है. खेती करने, खाद्य बीज खरीदने के लिए भी उन्हें साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसना पड़ता था।
इसी से निजात दिलाने के लिए साल 2019 में मोदी सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की जो 1 दिसंबर 2018 से प्रभावी (लागू) हुई थी। इसके जरिए देश के हर योग्य किसान को हर साल तीन किस्तों में 6000 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है ताकि उन्हें खेतीबाड़ी में मदद मिल सके। इसके अलावा ट्रिपल तालाक से जुड़े कानूनों में बदलाव के लिए भी सरकार की खूब तारीफ हुई।
ये तो पांच वो फैसले थे जिनके लिए मोदी सरकार की पूरे देश में तारीफ हुई लेकिन इस सरकार ने कई ऐसे फैसले भी लिए जिसके लिए उन्हें तीखी आलोचना झेलनी पड़ी और अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
कृषि कानूनों की वापसी (2020-21)
मोदी सरकार साल 2020-21 में तीन नए कृषि कानून लागू किए थे जिसका देशभर के किसानों ने भारी विरोध किया और सड़कों पर उतर गए। कई किसान संगठनों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। इस फैसले से सरकार की काफी किरकिरी हुई।
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर मोदी सरकार को हटना पड़ा पीछे
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद ही साल 2014-15 में मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लेकर आई। सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के लिए अध्यादेश लेकर आई थी। विपक्ष और किसान संगठनों के भारी विरोध के बाद सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाया और 2013 के कानून में संशोधन की कोशिशें रोक दी। यह पहला मौका था जब सरकार को अपने ही लिए फैसले से पीछे हटना पड़ा
अग्निवीर योजना
सेना में नियुक्ति और भर्ती में मोदी सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए अग्निवीर योजना को लागू किया जिसके बाद पूरे देश में इसका विरोध शुरू हो गया और लोग हिंसक हो गए। इस योजना में युवाओं को सिर्फ चार साल के लिए ही सेना में भर्ती के प्रावधान थे।
2022 में शुरू की गई अग्निवीर सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ उग्र प्रदर्शन हुए। इसके बाद सरकार ने योजना में कुछ बदलाव और स्पष्टीकरण किए, जिसमें भर्ती प्रक्रिया और पात्रता से जुड़े कुछ प्रावधानों पर संशोधन शामिल थे। उन्हें सेना में स्थायी नियुक्ति के प्रावधान भी जोड़े गए।
नोटबंदी के बाद नियमों में बदलाव
देश में नकली नोटों की बढ़ती आवक को देखते हुए मोदी सरकार ने 8 नंवबर 2016 को अचानक 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का ऐलान कर दिया. इस फैसले के बाद देश में नकदी संकट खड़ा हो गया और हर राज्य हर शहर में एटीएम और बैंकों में लोगों की लंबी लाइनें दिखने लगी।
हालात इतने बिगड़ गए कि वायुसेना को पूरे देश में बैंकों तक कैश पहुंचाने के काम में लगाना पड़ा। लोगों की परेशानियों को देखते हुए सरकार और RBI को बार-बार नियमों में बदलाव करना पड़ा और जमा-निकासी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करना पड़ा। इस फैसले ने सरकार की काफी किरकिरी कराई।
45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी
देश में बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को लेकर मोदी सरकार लगातार आलोचनाओं का शिकार होती है। दरअसल साल 2017-18 में मोदी सरकार ने बेरोजगारी पर आधिकारिक आंकड़े जारी किए थे। श्रम मंत्रालय ने मंत्रिमंडल गठन के दूसरे ही दिन यह आंकड़े जारी किए थे जिसके मुताबिक, देश में 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% रही। यह 45 साल में सबसे ज्यादा था।
ये कुछ ऐसे फैसले रहे जिसकी वजह से मोदी सरकार को लोगों के गुस्से का भी सामने करना पड़ा लेकिन अभी भी देश के ज्यादातर वोटरों का भरोसा उन पर बना हुआ है। अब पीएम मोदी विजन 2047 के तहत विकसित भारत की योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


