उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तिब्बत सीमा के पास स्थित इस इलाके में सुबह करीब नौ बजे नदी का जलस्तर अचानक इतनी तेजी से बढ़ा कि तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसे इलाकों में घर, वाहन और पुल तक बहा ले गया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यह मंजर इतना भयावह था कि मानो जमी हुई नदी अचानक अपने किनारे तोड़कर बह निकली हो।
इस भीषण बाढ़ में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं नेपाल पर्यटन विभाग के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार करीब 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें से 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय और 93 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और पर्यटक कैलाश मानसरोवर यात्रा और गोसाईंकुंडा की ओर जा रहे थे, जब यह हादसा हुआ, जिसके चलते लापता लोगों की संख्या इतनी अधिक बताई जा रही है।
बाढ़ के कारण इलाके में बिजली उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए और त्रिशूली-3बी जैसी प्रमुख हाइड्रो पावर परियोजनाओं के साथ-साथ त्रिशूली और देवीघाट पावर प्लांट भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा सड़कें, बिजली लाइनें और कई सब-स्टेशन भी बाढ़ की चपेट में आ गए, जिसके चलते प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार तिमुरे स्थित सीमा चौकी पर तैनात सशस्त्र पुलिस बल के कई जवान भी इस बाढ़ में लापता हो गए हैं। इसके अलावा रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय में तैनात कर्मचारियों के भी हादसे की चपेट में आने की आशंका जताई जा रही है। बाढ़ का पानी आगे बढ़ते हुए त्रिशूली नदी में जा मिला, जिससे नुवाकोट जिले के डाउनस्ट्रीम इलाकों में भी खतरा मंडराने लगा। नुवाकोट के त्रिशूली बाजार के पास करीब 60 घर बह जाने और त्रिशूली नदी पर बने दो पुलों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए चार सैन्य हेलीकॉप्टरों समेत कुल बारह हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। अब तक विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब बारह लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि सात घायलों को सैन्य हेलीकॉप्टर के जरिए धुंचे अस्पताल पहुंचाया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस आपदा को लेकर केंद्रीय आपदा प्रबंधन समिति की आपात बैठक भी बुलाई है।
जल विज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाढ़ भारी बारिश के बजाय तिब्बत क्षेत्र में स्थित किसी हिमनद झील के अचानक फटने यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के कारण आई हो सकती है। नेपाल का जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग चीन के अधिकारियों के साथ मिलकर सैटेलाइट डेटा के जरिए बाढ़ के असली कारणों का पता लगाने में जुटा है। गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई 2025 में भी इसी क्षेत्र में इसी तरह की विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें कम से कम नौ लोगों की जान गई थी और कई लोग लापता हो गए थे।
नेपाल प्रशासन ने नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को हाई अलर्ट पर रहने की चेतावनी दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के आसपास जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन नदी का जलस्तर अब भी बेहद खतरनाक बना हुआ है, जिसके चलते बचाव अभियान में भी बाधाएं आ रही हैं।


