मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गुरुवार को ऐलान किया कि विपक्ष संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने जा रहा है। राउत ने चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि CEC सरकार के इशारों पर काम कर रहे हैं और उन्होंने संवैधानिक पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उन्होंने यह भी मांग की कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर CEC के खिलाफ मकोका के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे लेकर विपक्षी दल लंबे समय से नाराज़गी जता रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर विपक्षी दलों के बीच सहमति बन चुकी है और जल्द ही संसद में इसके लिए औपचारिक नोटिस दिया जा सकता है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की कोशिश हुई हो। इससे पहले मार्च 2026 में भी विपक्षी सांसदों ने इसी तरह का प्रस्ताव लाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया था, जिसमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि उस समय राज्यसभा सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया एक सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से बिल्कुल अलग और काफी जटिल है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष प्रस्ताव पारित होना और दो-तिहाई बहुमत जुटाना ज़रूरी होता है, तभी राष्ट्रपति इस पर अंतिम आदेश जारी कर सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे व्यावहारिक रूप से एक कठिन राह मानते हैं, जब तक विपक्ष के पास आवश्यक संख्या बल न हो। फिलहाल भाजपा और सरकार की ओर से इस ताज़ा घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि चुनाव आयोग ने भी अभी तक इन आरोपों पर चुप्पी बनाए रखी है।


