सांप के डसे युवक को भाई ने जड़े 150 थप्पड़: एक साहसिक प्रयास से जीवन रक्षक इलाज
हरदोई जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र के ज्योति नगर में हुई एक दिल दहलाने वाली घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यहां एक युवक को जहरीले सांप ने डस लिया। उस समय पर प्राप्त मदद, डॉक्टरों की सूझ-बूझ और बड़े भाई के साहसिक कदम ने उसकी जान बचा ली। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जीवन रक्षक प्रयास और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण होती है।
यह घटना दोपहर लगभग 2 बजे की है। घटना स्थल पर मौजूद आकाश नामक व्यक्ति डेयरी व्यवसाय करते हैं। उनके छोटे भाई अरुण (21 वर्ष) खेत में पानी लेने गए थे। जैसे ही अरुण ने घास की बोरी उठाई, वहां छुपा हुआ एक जहरीला सांप अचानक डस गया। अरुण के चीखने पर आकाश तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों को सड़क की ओर भागते हुए देखा। उन्होंने तुरंत ही एंबुलेंस और पुलिस को सूचित किया।
अरुण की हालत तेजी से बिगड़ रही थी। उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने लगी थी और जहर का प्रभाव शरीर पर साफ दिख रहा था। इस बीच, प्रगति नगर निवासी शिवम शर्मा, जो एक मेडिकल स्टोर संचालक हैं, घटनास्थल से गुजर रहे थे। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत ही दोनों भाइयों को अपनी बाइक पर बैठाया और तुरंत मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। शिवम का त्वरित कदम और मेडिकल टीम की तत्परता ने इस पूरी घटना को जीवन रक्षक बना दिया।
मेडिकल कॉलेज पहुंचते ही, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) डॉ. शेर सिंह और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने तुरंत ही इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने मरीज के शरीर का परीक्षण करने के बाद, परिजनों को स्पष्ट कर दिया कि अरुण को किसी भी कीमत पर सोने नहीं देना चाहिए। क्योंकि सांप के जहर का प्रभाव यदि सोते ही बढ़ जाए, तो मरीज की जान खतरे में आ सकती है।
डॉक्टरों ने जहर को नियंत्रित करने के लिए दो घंटे के भीतर 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाए। सामान्यतः सांप के काटने पर पांच इंजेक्शन ही दिए जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति गंभीर होने के कारण, अधिक मात्रा में इंजेक्शन का सहारा लिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि सांप के काटने के बाद अगर मरीज का जागरूकता स्तर कम हो जाता है या वह सो जाता है, तो यह जानलेवा हो सकता है। इससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है और सांस की नली में उल्टी फंसने का खतरा बढ़ जाता है, जो अत्यंत खतरनाक है।
अरुण के बड़े भाई आकाश ने अपने भाई को होश में रखने के लिए लगभग 150 थप्पड़ मारे। उनका मानना था कि इससे अरुण जागृत रहेगा और वह अपनी स्थिति को समझ सकेगा। यह कदम साहस और तत्परता का परिचायक था, जिसने मरीज की जान बचाने में मदद की।
डॉक्टरों ने कहा कि समय पर अस्पताल पहुंचने और सही इलाज के कारण अरुण की जान बच सकी। उनके शरीर में जहर का प्रभाव इतना अधिक था कि यदि देर हो जाती तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। अब अरुण का इलाज जारी है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
यह घटना हमारे लिए यह भी संदेश है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना कितना जरूरी होता है। साथ ही, साहस और त्वरित कार्रवाई से भी जिंदगियों को बचाया जा सकता है। शिवम शर्मा और मेडिकल टीम की तत्परता और आकाश का साहसिक कदम इस घटना की सबसे बड़ी सीख हैं।

