संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज भारत ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और कहा कि राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद संधि पर द्विपक्षीय सहयोग को कमजोर कर रहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन जारी रखना इस विवादित संधि के समाधान की दिशा में बाधा बन रहा है और इससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी पैदा हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथानेनी ने उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा, “पाकिस्तान ने मंच का दुरुपयोग करते हुए झूठा नैरेटिव फैलाने का प्रयास किया है। हम इस मंच का उपयोग अपने मुद्दों को उठाने के लिए करते हैं, लेकिन पाकिस्तान का इस तरह का झूठा प्रचार हमारे सहयोग को प्रभावित कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद को खत्म किए बिना, सहयोग और विश्वास की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, और इसे पाकिस्तान द्वारा जानबूझकर नकारा जा रहा है। “यह क्षेत्र भारत का हिस्सा है, और पाकिस्तान का इससे इनकार करना संविधानिक और कानूनी वास्तविकताओं का उल्लंघन है।

पाकिस्तान को घेरते हुए परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने भारतीय जल संसाधनों पर अपनी शिकायतें उठाते हुए, संधि के विवाद समाधान तंत्र का बार-बार दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने जलभंडारण में असफल रहा है और अपने हिस्से का जल प्रबंधन ठीक से नहीं कर पाया है, जबकि भारत ने तकनीकी परियोजनाओं और basin management पर जोर दिया है।

संबंधित मुद्दों पर बात करते हुए, भारत ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि अब अप्रासंगिक हो चुकी है, और पाकिस्तान की ओर से इस पर पुनर्विचार का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। भारत ने यह भी कहा कि संधि का विवाद समाधान तंत्र, जिसमें मध्यस्थता न्यायालय भी शामिल है, अवैध रूप से कार्य कर रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया का उल्लंघन किया है।

भारत ने यह भी कहा कि संधि पर बातचीत तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद को समाप्त कर, अपने आंतरिक सुधारों को पूरा कर ले। साथ ही, भारत ने अपने जल विकास परियोजनाओं पर भी जोर दिया, जिसमें जलाशय प्रबंधन और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण शामिल है। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद को खत्म किए बिना, संधि और सहयोग की कोई संभावना नहीं है, और पाकिस्तान को अपने घरेलू कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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