रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत पहुंच चुके हैं। वे 10 सितंबर की रात नई दिल्ली उतरे, जहां विदेश राज्य मंत्री ने उनका स्वागत किया। तीन दिनों के इस दौरे में पुतिन दिल्ली के एक पंच सितारा होटल में ठहरेंगे। राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन की प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी प्रस्तावित है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
रक्षा सहयोग बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा सौदों से जुड़ी चर्चा होने वाली है। बातचीत में S-400 मिसाइल सिस्टम की बाकी बची डिलीवरी, अतिरिक्त बैटरियां, ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन, Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने और नए Su-57 फाइटर जेट जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट की तकनीक भारत को देने और उसका निर्माण भारत में ही करवाने जैसी भारतीय शर्तों को मानने के लिए भी तैयार है।
आत्मनिर्भरता और साझा उत्पादन पर जोर
भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने के बजाय तकनीक हासिल करने और खुद उत्पादन करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जिससे मेक इन इंडिया अभियान को बल मिले। इसीलिए तकनीक ट्रांसफर और संयुक्त निर्माण वाले प्रस्ताव भारत को ज्यादा पसंद आ रहे हैं। रूस भी अपना निर्यात बढ़ाने और भारत जैसे भरोसेमंद साथी के साथ रिश्ते और मजबूत करना चाहता है। दोनों देश अब सिर्फ खरीदार-विक्रेता के रिश्ते से आगे बढ़कर मिलकर रिसर्च और तकनीकी विकास पर काम करना चाहते हैं।
व्यापार भी एजेंडे में शामिल
रक्षा के अलावा ऊर्जा, कारोबार और निवेश जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बनेंगे। दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखा है, जिस पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इससे साफ है कि भारत-रूस रिश्ता अब सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।
तुरंत बड़े सौदे की उम्मीद कम
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुलाकात में तुरंत किसी बड़े समझौते पर दस्तखत होने की संभावना कम है, लेकिन आगे रक्षा सहयोग किस दिशा में बढ़ेगा, इसकी रूपरेखा जरूर बन जाएगी। ब्रिक्स मंच से हो रही यह मुलाकात सिर्फ भारत-रूस संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा नीति पर भी दिख सकता है।
रिपोर्ट- सोनू सिंह

