रसुवा में आई बाढ़ का असर अब नेपाल के दूसरे इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। रविवार को त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से काठमांडू को सोनौली सीमा से जोड़ने वाले काठमांडू-मुग्लिंन मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया। धादिंग जिले में कृष्णभीर के पास सड़क का करीब 30 मीटर हिस्सा नदी के तेज बहाव में धंस गया। सड़क के नीचे लगातार हो रहे कटाव के कारण पहले दरारें पड़ीं और कुछ ही देर में सड़क का बड़ा हिस्सा बैठ गया। हालात बिगड़ने के बाद इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ी।
तेज बहाव में नदी ने काट दिया सड़क का बेस
धादिंग के प्रमुख जिला अधिकारी लक्ष्मी पाण्डेय गौतम के मुताबिक, रविवार सुबह त्रिशूली नदी में अचानक पानी का बहाव काफी तेज हो गया। बेनीघाट गांवपालिका-7 के कृष्णभीर इलाके में नदी का पानी सड़क के नीचे की जमीन को काटने लगा। देखते ही देखते सड़क पर दरारें दिखाई देने लगीं और करीब 30 मीटर लंबा हिस्सा धंसकर नदी की तरफ चला गया।
शुरुआत में प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए कुछ समय के लिए वन-वे यातायात शुरू कराया था। हालांकि, नदी का बहाव लगातार तेज होता गया और सड़क के नीचे कटाव बढ़ने लगा। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अधिकारियों को मार्ग पूरी तरह बंद करने का फैसला लेना पड़ा।
कृष्णभीर और परेवाभील के पास भी नुकसान
काठमांडू-मुग्लिंन सड़क के कृष्णभीर के साथ-साथ परेवाभील इलाके में भी सड़क को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। लगातार बारिश और त्रिशूली नदी के बढ़ते जलस्तर ने इस पूरे मार्ग पर खतरा बढ़ा दिया है। प्रशासन और सड़क विभाग की टीमें मौके पर स्थिति का जायजा ले रही हैं और सड़क को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क की मरम्मत और सुरक्षित तरीके से यातायात शुरू करने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। हालांकि, नदी का जलस्तर और मौसम की स्थिति सामान्य रहने पर ही काम तेजी से आगे बढ़ पाएगा।
नेपाल के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है यह सड़क
काठमांडू-मुग्लिंन सड़क नेपाल के सबसे व्यस्त मार्गों में गिनी जाती है। रोजाना करीब 15 हजार वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। राजधानी काठमांडू को देश के कई प्रमुख शहरों और भारत की सोनौली सीमा से जोड़ने में इस मार्ग की बड़ी भूमिका है। सड़क बंद होने का सीधा असर काठमांडू, पोखरा, चितवन और सोनौली सीमा की ओर आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है। दोनों दिशाओं में बड़ी संख्या में वाहन फंस गए हैं। कई यात्रियों को रास्ते में ही रुकना पड़ा, जबकि मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
चितवन पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
मार्ग की स्थिति को देखते हुए चितवन पुलिस ने भी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने नारायणगढ़ से काठमांडू और काठमांडू से नारायणगढ़ की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे फिलहाल इस रास्ते पर यात्रा करने से बचें और प्रशासन की ओर से मार्ग खुलने की सूचना मिलने के बाद ही आगे बढ़ें। सड़क बंद होने से उन यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है जो काठमांडू से भारत की सोनौली सीमा की तरफ जा रहे थे। वहीं, भारत से नेपाल की ओर जाने वाले यात्रियों और सामान लेकर चल रहे वाहनों के लिए भी यह मार्ग अहम है।
बाढ़ का असर बढ़ने से बढ़ी चिंता
रसुवा में आई बाढ़ के बाद अब त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे इलाकों के साथ-साथ सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। कृष्णभीर में सड़क का हिस्सा बहना इस बात का संकेत है कि तेज बहाव और लगातार हो रहे कटाव के कारण आने वाले समय में भी इस मार्ग पर खतरा बना रह सकता है। प्रशासन फिलहाल हालात पर नजर रख रहा है और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहा है।
दो से तीन दिन में रास्ता खोलने की कोशिश
सड़क विभाग की टीम प्रभावित हिस्से की जांच कर रही है। सड़क के नीचे का हिस्सा काफी कमजोर होने के कारण केवल ऊपर से मरम्मत करके यातायात शुरू करना संभव नहीं माना जा रहा। पहले नदी के कटाव को रोकने और सड़क के बेस को मजबूत करने की जरूरत होगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे वैकल्पिक मार्गों की जानकारी लेकर ही यात्रा करें। जब तक सड़क पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक प्रशासन किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
त्रिशूली नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच काठमांडू-मुग्लिंन मार्ग का धंसना नेपाल के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। यह सड़क राजधानी को देश के दूसरे हिस्सों और भारत की सोनौली सीमा से जोड़ती है, इसलिए इसके बंद होने का असर सिर्फ स्थानीय यातायात पर नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्री और मालवाहक आवाजाही पर भी पड़ रहा है।

