गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे: गोरखपुर से पानीपत तक प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के लिए चिह्नित जमीन पर सीमांकन का काम शुरू कर दिया गया है। कई गांवों में जमीन की पहचान करने के बाद वहां पीले रंग के खंभे लगाए जा रहे हैं। इन खंभों के जरिए यह स्पष्ट किया जा रहा है कि किन हिस्सों की जमीन प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के दायरे में आएगी।
एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी हलचल तेज हो गई है। जिन किसानों की जमीन प्रस्तावित मार्ग के लिए चिह्नित की गई है, वे अब मुआवजे और अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि उनकी जमीन के बदले मिलने वाला मुआवजा मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में कम है।
गांवों में जमीन की पैमाइश और सीमांकन शुरू
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए कई गांवों में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अधिकारियों और संबंधित टीमों की ओर से जमीन का निरीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद चिह्नित स्थानों पर पीले खंभे लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, खंभे लगने के बाद किसानों को पहली बार स्पष्ट रूप से अंदाजा हो रहा है कि एक्सप्रेसवे की सड़क किस दिशा से गुजरेगी और किस-किस की जमीन परियोजना की जद में आएगी।
हालांकि, सीमांकन के साथ ही किसानों के बीच मुआवजे को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। कई किसान इस बात से परेशान हैं कि अगर उनकी कृषि भूमि अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें उसके बदले पर्याप्त राशि नहीं मिल पाएगी।
‘जमीन की कीमत के हिसाब से मुआवजा मिले’
किसानों का कहना है कि जमीन केवल एक संपत्ति नहीं होती, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार होती है। पीढ़ियों से खेती कर रहे किसानों के लिए जमीन का अधिग्रहण उनके भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला है। ऐसे में उनका कहना है कि मुआवजा तय करते समय मौजूदा बाजार दर, जमीन की वास्तविक कीमत और उससे होने वाली आय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि प्रस्तावित मुआवजा जमीन की मौजूदा कीमत की तुलना में कम है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जमीन चली गई तो उनके पास खेती और आय का मुख्य साधन नहीं रहेगा। ऐसे में उन्हें ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे वे अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकें।
एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे को पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से कई जिलों के बीच यात्रा का समय कम होने और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत होने के साथ ही परिवहन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, परियोजना का काम शुरू होने से पहले जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों की सहमति और उचित मुआवजे का मुद्दा सबसे अहम बना हुआ है।
किसानों की चिंताओं का समाधान जरूरी
गांवों में पीले खंभे लगाए जाने के बाद अब किसानों की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। किसान चाहते हैं कि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और उन्हें जमीन के बदले उचित मुआवजा मिले। ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं और सड़क बनने से क्षेत्र को फायदा भी होगा, लेकिन विकास की कीमत किसानों को नुकसान उठाकर नहीं चुकानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को परियोजना के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।
जमीनों के सीमांकन और पीले खंभे लगाने का काम शुरू होने के बाद गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे परियोजना ने मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र में रफ्तार पकड़ ली है। अब आने वाले दिनों में मुआवजे और जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगी।


