गोरखपुर: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों जिंदगियों को तबाह कर दिया। लाशों को दफनाने के लिए नेपाल में जमीन कम पड़ गई। इसी आपदा से बचकर गोरखपुर लौटे आशुतोष ने जो देखा, उसे याद कर आज भी उनकी रूह कांप उठती है। आशुतोष का दावा है कि उनकी आंखों के सामने कई लोग बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। इधर, तीन दिनों तक बेटे की सलामती के लिए तड़प रहे माता-पिता ने जब उसे अपने सामने जिंदा देखा, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
नेपाल की त्रासदी को याद कर कांप उठते हैं आशुतोष
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से किसी तरह बचकर गोरखपुर पहुंचे आशुतोष जब अपने घर पहुंचे तो परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन आशुतोष के मन में अभी भी उस खौफनाक मंजर की तस्वीरें जिंदा हैं।
आशुतोष बताते हैं कि चारों तरफ तबाही का मंजर था। तेज बहाव में लोग बह रहे थे, कई लोग घायल पड़े थे और हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई लोगों को बाढ़ में बहते देखा।
पोते के लौटने की उम्मीद छोड़ चुके थे दादा
उधर, बेटे की कोई पक्की खबर न मिलने से माता-पिता तीन दिनों तक बेचैन रहे। हर आने वाली सूचना उनके लिए उम्मीद और डर के बीच झूलती रही। कभी किसी ने बेटे के सुरक्षित होने की बात कही तो कभी जानकारी न मिलने से चिंता और बढ़ गई।
लेकिन जब आशुतोष सकुशल घर पहुंचे और मां ने अपने बेटे को आंखों के सामने देखा, तो तीन दिनों का दर्द आंसुओं में बह निकला। वहीं आशुतोष के दादा ने कहा, ‘हमें उम्मीद नहीं थी कि बेटा वापस आएगा, लेकिन आज उसे अपनी आंखों के सामने देखकर लग रहा है कि हमें दुनिया की सारी दौलत मिल गई।’
रिपोर्ट: मुकेश कुमार


