दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG की इमारत गिरने की घटना के बाद अब आसपास की दूसरी इमारतों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। PG भवन के गिरने के बाद उससे सटी एक बिल्डिंग में दरारें सामने आई हैं। स्थिति को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने संबंधित भवन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम की ओर से बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी करते हुए इसे निर्धारित समय के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है।
MCD के मुताबिक, इमारत की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। ऐसे में किसी संभावित हादसे को रोकने के लिए निगम ने भवन को हटाने का फैसला किया है। आदेश में साफ कहा गया है कि नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर बिल्डिंग को ध्वस्त करना होगा।
PG गिरने के बाद सामने आईं दरारें
सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने की घटना के बाद आसपास के भवनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे। इसी दौरान बगल वाली इमारत में दरारें दिखाई दीं। इसके बाद भवन की स्थिति का निरीक्षण किया गया। दरारें सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने इसे संभावित खतरे के तौर पर देखा। खासकर घनी आबादी वाले सत्य निकेतन जैसे इलाके में किसी कमजोर इमारत का बने रहना लोगों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसी को देखते हुए निगम ने तत्काल कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
6 सितंबर को जारी हुआ आदेश
दक्षिण जोन के ग्रीन पार्क स्थित MCD कार्यालय के कार्यकारी अभियंता (बिल्डिंग)-I की ओर से 6 सितंबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। यह कार्रवाई दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348 के तहत की गई है। निगम के आदेश में भवन मालिक को निर्देश दिया गया है कि नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर संबंधित इमारत को ध्वस्त कर दिया जाए। यानी निगम ने मालिक को खुद कार्रवाई करने के लिए सीमित समय दिया है।
तीन दिन में नहीं तो निगम कर सकता है कार्रवाई
निगम की ओर से जारी निर्देश का मकसद जर्जर या असुरक्षित भवन के कारण होने वाले संभावित हादसे को रोकना है। ऐसे मामलों में भवन मालिक को पहले इमारत खाली कराने और उसे सुरक्षित तरीके से हटाने का निर्देश दिया जाता है। अगर तय समय में भवन मालिक की ओर से आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो निगम अपने स्तर पर आगे की कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले भी दिल्ली में असुरक्षित और जर्जर इमारतों के खिलाफ MCD ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करता रहा है।
आसपास रहने वाले लोगों में बढ़ी चिंता
PG की इमारत गिरने के बाद बगल की बिल्डिंग में दरारें आने की खबर से आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र और किराएदार रहते हैं। ऐसे में किसी इमारत की संरचनात्मक स्थिति खराब होने पर उसका असर वहां रहने वाले लोगों पर सीधे पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर लोग चाहते हैं कि आसपास की इमारतों की भी जांच की जाए, ताकि किसी दूसरे भवन में ऐसी समस्या होने पर समय रहते कदम उठाया जा सके। खासकर पुरानी या निर्माण के दौरान नियमों का पालन नहीं करने वाली इमारतों को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
हादसे के बाद भवन सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में PG भवन गिरने की घटना ने एक बार फिर दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में भवनों की सुरक्षा और निर्माण मानकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किराए पर चल रहे PG और अन्य आवासीय इमारतों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। ऐसे में भवन की मजबूती, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है। बगल की इमारत में दरारें मिलने के बाद MCD का ध्वस्तीकरण आदेश इस बात का संकेत है कि निगम संभावित खतरे को लेकर सतर्क है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि भवन मालिक तय तीन दिनों के भीतर आदेश का पालन करता है या निगम को आगे की कार्रवाई करनी पड़ती है। MCD की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसी नए हादसे की आशंका को टालना और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


