Uttarpradesh news : KGMU में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। घोटाले की राशि की वसूली के लिए एजेंसी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया गया है, और तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों एवं नियमित फार्मासिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
KGMU दवा घोटाला: हर महीने असाध्य योजना से खरीदी जाती थीं 10 लाख की दवाइयां
यूरोलॉजी विभाग में पिछले वर्ष असाध्य योजना के तहत हर महीने लगभग 10 लाख रुपये की दवाइयों की खरीद की जाती थी। इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाएं खरीदी जाती हैं, ताकि जरूरतमंद और गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिल सके। हालांकि, इस साल की शुरुआत में इस योजना के तहत दवाओं का बजट अचानक तीन से चार गुना तक बढ़ गया। पिछले महीने ही लगभग 45 लाख रुपये की दवाइयों की खरीद दर्ज की गई। महंगी दवाओं की खपत में अचानक बढ़ोतरी पर केजीएमयू प्रशासन को संदेह हुआ। अधिकारियों ने जिन मरीजों के नाम पर दवाएं मंगाई गई थीं, उनके इलाज संबंधी दस्तावेज जुटाने शुरू किए। जांच में करीब 40 ऐसे मरीज मिले जिन्हें बार-बार कागजों में भर्ती दिखाया गया था। उनके नाम पर कैंसर, प्रोटीन और आयरन की महंगी दवाएं मंगाई गईं।

KGMU में बड़ी कार्रवाई, विभागाध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल पद से हटे
घटना की जानकारी मिलने पर कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने सोमवार को अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया। यह कार्रवाई योजना की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही के आरोपों के आधार पर की गई है। फिलहाल जांच पूरी होने तक उन्हें पद से अलग रखा गया है ताकि प्रक्रिया प्रभावित न हो। उनकी जगह जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. एचएस पहवा को यूरोलॉजी विभाग का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
तीन कर्मचारी बर्खास्त, चार पर मुकदमा
प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में हुए दवा घोटाले में तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों—पी. सिंह, एच. श्रीवास्तव और एस. तिवारी—को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। इन तीनों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। साथ ही, सेवा प्रदाता कंपनी से घोटाले की राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यूरोलॉजी विभाग के लोकल परचेज काउंटर पर तैनात नियमित फार्मासिस्ट अरशद वासी को भी निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है।


