लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में अगले छह महीनों के भीतर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ ही इसे पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए भर्ती प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने भर्ती कराने वाले आयोगों और बोर्डों से कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में होने वाली भर्तियां पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए। योग्य उम्मीदवारों का चयन केवल उनकी योग्यता और मेरिट के आधार पर हो, ताकि किसी भी अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायत का मौका न मिले। उन्होंने संबंधित भर्ती आयोगों और बोर्डों को अपनी कार्यप्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में देरी का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक हर चरण को तय समय में पूरा करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने भर्ती आयोगों और बोर्डों की कार्यप्रणाली को लेकर भी अहम बात कही। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। योगी ने अधिकारियों से कहा कि भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए चयन प्रक्रिया में नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और योग्य अभ्यर्थियों को उनकी मेहनत का परिणाम समय पर मिले।
सरकार की ओर से तय किए गए इस लक्ष्य के तहत अगले छह महीनों में करीब एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने की बात कही गई है। इससे अलग-अलग सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेजी मिलने की उम्मीद है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि नियुक्ति तक पहुंचने में परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं में काफी समय लग जाता है। सरकार का जोर अब इन सभी चरणों को तेजी से पूरा करने पर है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकारी भर्तियों में किसी भी तरह की सिफारिश या पक्षपात की जगह नहीं होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया का आधार अभ्यर्थी की योग्यता और निर्धारित नियम होंगे। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि भर्ती परीक्षाओं का आयोजन, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, परिणाम जारी करने और नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में एक लाख नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य सरकार के रोजगार एजेंडे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन भर्तियों की प्रक्रिया चल रही है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ उसकी निष्पक्षता से भी समझौता नहीं किया जाएगा। यानी सरकार के सामने एक तरफ जल्द से जल्द नियुक्तियां पूरी करने का लक्ष्य है, तो दूसरी तरफ चयन प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक पारदर्शी बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजर अब आगामी भर्ती प्रक्रियाओं और उनके परिणाम पर रहेगी। अगले छह महीनों में एक लाख नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य पूरा करने के लिए भर्ती बोर्डों और आयोगों को तेजी से काम करना होगा। सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों का असर आने वाले महीनों में भर्ती परीक्षाओं के कैलेंडर, परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। हालांकि अलग-अलग विभागों में पदों की संख्या और नियुक्ति की समयसीमा संबंधित भर्ती प्रक्रिया के अनुसार तय होगी।

