केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रहलाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
पिछले कुछ समय से देश भर में चल रहे छात्र आंदोलनों और पेपर लीक विवादों के कारण शिक्षा मंत्रालय पर भारी दबाव था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरकार का मानना है कि इस संवेदनशील मोड़ पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना और शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रहलाद जोशी अब अपने वर्तमान मंत्रालयों खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रहलाद जोशी के सामने कई कठिन चुनौतियां हैं, जिनमें प्रमुख हैं। प्रणाली में सुधार, वर्तमान परीक्षा ढांचे को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना। NTA का पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की समीक्षा और उसमें आमूल-चूल बदलाव करना। छात्र विश्वास: छात्रों के बीच परीक्षाओं को लेकर पैदा हुई असुरक्षा की भावना को समाप्त करना।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रहलाद जोशी का अनुभव, जो कि सरकार के संकटमोचक माने जाते हैं, शिक्षा प्रणाली में स्थिरता लाने में मददगार साबित होगा। अनुच्छेद 75 के तहत हुई यह नियुक्ति सरकार की मंशा को दर्शाती है कि वह शिक्षा क्षेत्र के विवादों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए गंभीर है।
रिपोर्ट- सोनू सिंह

