NEET पेपर लीक मामले को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार दूसरे दिन भी कार्यवाही बाधित रही। विपक्ष ने पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों के खिलाफ केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए हैं, वहीं सरकार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि वह इस मामले में सक्रिय है और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि जैसे ही नीट पेपर लीक का मामला सामने आया, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। विपक्षी दलों ने प्रधान का इस्तीफा भी मांगा है, जिसे सरकार राजनीति से प्रेरित मानती है। मंगलवार शाम को विपक्ष के नेता ने सरकार के सामने पांच मांगें रखीं, जिनमें प्रधान का इस्तीफा शीर्ष पर था।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस मामले की जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी दी है और अब तक 13 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि निष्पक्ष जांच हो रही है और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “घोर पाप” कहा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।
प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र को इस मुद्दे पर मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का है। उन्होंने सांसदों से भी युवाओं का भरोसा जीतने और उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने का आग्रह किया।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर छात्रों का शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए अपने समर्थकों से माफी की भी मांग की।
संसद में चर्चा की अनुमति देने को लेकर सरकार तैयार है, पर अभी तक कार्यवाही बाधित ही रही। इस पूरे मामले में राजनीति गरमाई हुई है और सरकार व विपक्ष दोनों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला रहे हैं।

