Shiv Sena-UBT: राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब Shiv Sena-UBT के छह लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली Shiv Sena का दामन थाम लिया। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में इन सांसदों का औपचारिक स्वागत किया गया। इस मौके पर Shinde गुट के नेताओं ने इसे ‘Operation Tiger‘ की सफलता बताते हुए कहा कि यह Shiv Sena के विस्तार और मजबूती की दिशा में एक अहम कदम है।
इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में Uddhav Thackeray के लिए एक और बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2022 में शुरू हुए राजनीतिक संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब लोकसभा स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में सांसदों ने उद्धव गुट का साथ छोड़कर शिंदे गुट का रुख किया है।
Eknath Shinde बोले- यह बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा की जीत
सांसदों के शामिल होने के बाद Eknath Shinde ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों की जीत है।
उन्होंने कहा, “22 जून 2022 को हमने Shiv Sena की विचारधारा, पार्टी के अस्तित्व और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह को बचाने के लिए संघर्ष शुरू किया था। उस समय हमारे साथ 40 विधायक थे। आज छह सांसद हमारे साथ जुड़े हैं और इस आंदोलन को नई ताकत मिली है। अब हमारे साथ एक नहीं, बल्कि छह नए टाइगर हैं।”
शिंदे ने दावा किया कि जो भी शिवसैनिक वास्तव में बालासाहेब ठाकरे की सोच और हिंदुत्व की विचारधारा में विश्वास रखते हैं, वे अंततः Shiv Sena के साथ ही खड़े होते हैं।
‘जनता और कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद लिया फैसला‘
Eknath Shinde ने कहा कि पार्टी में शामिल हुए सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं और जनता से विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इन सांसदों का मुख्य उद्देश्य अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना है। Shinde के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय के जरिए विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
2022 की बगावत का दूसरा चरण माना जा रहा कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम वर्ष 2022 में हुई उस बड़ी बगावत का दूसरा चरण है, जब Eknath Shinde ने शिवसेना के कई विधायकों के साथ Uddhav Thackeray के नेतृत्व को चुनौती दी थी।
उस बगावत के बाद महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी और Shinde राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। बाद में चुनाव आयोग ने भी Shinde गुट को ही असली Shiv sena और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह का अधिकार दिया था।
अब छह सांसदों का शामिल होना यह संकेत देता है कि Shinde गुट लोकसभा और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
उद्धव ठाकरे खेमे के लिए बढ़ी चुनौती
लोकसभा सांसदों के इस कदम से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली Shiv Sena (UBT) के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। हाल के वर्षों में पार्टी को पहले विधायकों और फिर नेताओं के पलायन का सामना करना पड़ा है। अब सांसदों का जाना संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों से पहले यह बदलाव महाराष्ट्र की राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ेगा सियासी तापमान
छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। एक ओर शिंदे इसे अपनी विचारधारा और नेतृत्व की जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर Uddhav Thackeray गुट के लिए यह अस्तित्व और संगठन को मजबूत बनाए रखने की बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजरें टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या और नेता तथा जनप्रतिनिधि भी शिंदे गुट का रुख करते हैं या Uddhav Thackeray अपनी पार्टी को एकजुट रखने में सफल होते हैं। फिलहाल, ‘Operation Tiger’ ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय जरूर जोड़ दिया है।

