VISCERAL FAT: फिटनेस ट्रेंड ,जिम कल्चर, हैल्थी लाइफस्टाइल को अपनाने वाली GenZ आज पहले से ज़यादा स्वास्थ के प्रति जागरूक नजर आती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस पीढ़ी के सामने एक ऐसी स्वास्थ्यए समस्या तेज़ी से उभर यही है। जो अक्सर नज़र नहीं आती, जिसे हम विसेरल फैट (visceral fat) कहते है।
विसेरल फैट पेट के अंदर गहराई में जमा होने वाली वसा होती है, जो यकृत, अग्न्याशय और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को घेरे रहती है। त्वचा के नीचे पाई जाने वाली वसा के विपरीत, अतिरिक्त आंतरिक वसा सूजन पैदा करने वाले रसायन और हार्मोन छोड़ती है, जिससे टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
क्यों बढ़ रही है विसेरल फैट की समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, आज की लाइफस्टाइल इसके पीछे का बड़ा कारण है। घंटो स्क्रीन टाइम, काम शारीरिक गतिविधियां, देर रात तक जागना, उन्हेअल्थी फ़ूड का सेवन और तनाव का बढ़ना युवाओं में विसेरल फैट बढ़ने में एहम भूमिका निभा रहा है।
शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है?
– मेटाबोलिज्म धीमा हो सकता है
– ब्लड शुगर लेवल प्रभावित्त होता है
– हृदय सम्बंधित बिमारियों का खतरा बढ़ सकता है
– फैटी लिवर और हार्मोनल असंतुलन की संभावना बढ़ सकती है
-पैंक्रियास पर दबाव पड़ता है
क्या कहते हैं स्वास्थ्यए विशेषज्ञे?
स्वास्थ्यए विशेषज्ञयों का यह मानना है कि सिर्फ वज़न या बॉडी शेप देख के फिटनेस का आकलन नहीं किया जा सकता। नियमित कसरत, संतुलित आहार, प्रयाप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसी आदतें Visceral Fat को काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
निष्कर्ष
जहां पुरानी पीढ़ी आमतौर पर उम्र बढ़ने के कारण ज्यादा विसरल फैट का सामना करती है, वहीं GenZ अनोखी लाइफस्टाइल और एनवायर्नमेंटल फैक्टर्स से जूझ रही है, जिससे जीवन में जल्दी ही हिडन फैट बिल्डअप हो सकता है। विसेरल फैट एक ऐसा खतरा है जो बिना किसी स्पष्ट संकेत के लम्बे समय में गंभीर स्वास्थ्यए समस्याओं की वजह बन सकता है। इसलिए केवल फिट होना नहीं बल्कि अपने “अंदर से स्वस्थ” रहना भी उतना ही जरूरी है।


