नई दिल्ली: देशभर में Paper Leak और परीक्षा में धांधली के मामलों को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को लोकसभा ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 को ध्वनिमत (Voice Vote) से पास कर दिया। इस नए कानून का मकसद सरकारी परीक्षाओं में होने वाली नकल, पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया पर सख्त लगाम लगाना है। सरकार का कहना है कि अब परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही मामलों की जांच और सुनवाई भी तय समय सीमा के अंदर पूरी करने का प्रावधान किया गया है।
अब नकल और पेपर लीक पर होगी सख्त सजा
संशोधन बिल के तहत सबसे बड़ा बदलाव सजा को लेकर किया गया है। अब परीक्षा में धांधली या Paper Leak जैसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले लोगों को कम से कम 5 साल की जेल होगी। पहले यह न्यूनतम सजा 3 साल थी। इतना ही नहीं, अधिकतम सजा भी बढ़ाकर 10 साल तक कर दी गई है, जबकि पहले इसकी सीमा 5 साल थी। सरकार का मानना है कि कड़ी सजा से ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
जुर्माना भी कई गुना बढ़ाया गया
नए बिल में आर्थिक दंड भी काफी सख्त कर दिया गया है। अब दोषी पाए जाने वाले लोगों पर अधिकतम ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। पहले यह सीमा ₹10 लाख थी। सरकार का कहना है कि सिर्फ जेल की सजा ही नहीं, बल्कि भारी जुर्माना भी परीक्षा माफिया के खिलाफ बड़ा हथियार साबित होगा। Paper Leak
एग्जाम कराने वाली एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई
अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर, एजेंसी या संस्था परीक्षा में गड़बड़ी या Paper Leak में शामिल पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कड़ा एक्शन लिया जाएगा। ऐसे मामलों में अब ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। पहले यह सीमा ₹1 करोड़ थी। इसके अलावा संबंधित एजेंसी को 8 साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा का आयोजन करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है। पहले यह अवधि 4 साल थी।
कंपनी के बड़े अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
सरकार ने सिर्फ संस्थाओं ही नहीं, बल्कि उनके जिम्मेदार अधिकारियों को भी कानून के दायरे में लाया है। अगर किसी संस्था के निदेशक, मालिक या वरिष्ठ अधिकारी परीक्षा में धांधली में शामिल पाए जाते हैं या उनकी भूमिका सामने आती है, तो उन्हें भी कम से कम 5 साल की जेल का सामना करना पड़ेगा। साथ ही उन पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
इस संशोधन बिल में एक और अहम प्रावधान जोड़ा गया है। अब परीक्षा से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएंगी।सरकार का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच और अदालत की प्रक्रिया लंबी चलती है, जिससे दोषियों को सजा मिलने में देरी होती है। नए प्रावधान के तहत जांच और ट्रायल तय समय के भीतर पूरा करने की कोशिश की जाएगी, ताकि पीड़ित छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
छात्रों के विरोध के बाद सरकार ने उठाया कदम
पिछले कुछ समय में देशभर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के Paper Leak होने के आरोप लगे थे। इन घटनाओं के बाद लाखों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बढ़ा। इसी बीच 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इस संशोधन बिल को संसद में पेश किया।
सरकार का दावा- ईमानदार छात्रों के साथ नहीं होगा अन्याय
सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद उन लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है, जो सालों तक तैयारी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। पेपर लीक और नकल जैसी घटनाएं न सिर्फ छात्रों की मेहनत पर पानी फेरती हैं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। सरकार का दावा है कि नए कानून के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया पर सख्त लगाम लगेगी, जांच तेजी से होगी और दोषियों को जल्द सजा मिलेगी। इससे सरकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा। Paper Leak


