“देश में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें तीसरी बार बढ़ गई हैं। इस बढ़ोतरी के साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने की मांग फिर उठ गई है। सीटीआई के चेयरमैन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा टैक्स सिस्टम की बजाय जीएसटी लागू करने की सिफारिश की है।”

पेट्रोल की कीमत अब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी है, जिसके चलते एक बार फिर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग जोर पकड़ रही है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने पीएम मोदी को पत्र भेजकर सुझाव दिया है कि पेट्रोल और डीजल को स्थायी रूप से जीएसटी में शामिल किया जाए। पत्र में उन्होंने कहा है कि इससे ईंधन की कीमतें कम होने पर महंगाई पर नियंत्रण करना आसान होगा।

CTI ने इस मुद्दे पर लिखा  लंबे समय से व्यापारी, फैक्ट्री मालिक और आम लोग पेट्रोल और डीजल पर जीएसटी लागू करने की मांग कर रहे हैं। बृजेश गोयल ने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में 22 मई तक पेट्रोल का वास्तविक मूल्य 66.29 रुपये था, जिस पर 11.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी, 16.03 रुपये VAT और 4.42 रुपये डीलर का मार्जिन जोड़कर अंतिम कीमत बनती है।

डीजल पर कितना है अभी टैक्‍स 

इसी तरह, डीजल का वास्तविक मूल्य 67.36 रुपये होता है, जिस पर एक्साइज ड्यूटी 7.80 रुपये और VAT 13.39 रुपये लगता है, जबकि डीलर का मार्जिन 3.03 रुपये प्रति लीटर होता है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि आज के समय में पेट्रोल के वास्तविक मूल्य पर एक्साइज ड्यूटी और वैट को मिलाकर लगभग 42% टैक्स लगता है जबकि डीजल पर लगभग 32% टैक्स लगाया जाता है.

कहां मिलता है सबसे महंगा पेट्रोल
CTI के मुताबिक, देश में तेलंगाना में पेट्रोल सबसे महंगा है. तेलंगाना राज्‍य में पेट्रोल पर सर्वाधिक वैट लगाया जाता है, जो 35.2% होता है, जबकि अंडमान निकोबार में पेट्रोल और डीजल पर केवल 1% वैट लगता है. इस वजह से तेलंगाना में जहां सबसे महंगा पेट्रोल मिलता है, वहीं अंडमान निकोबार में सबसे सस्‍ता तेल बिकता है. बृजेश गोयल ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि साल 2017 में जब GST लागू किया गया था तो वन नेशन वन टैक्स की बात कही गई थी और कहा गया था कि देश में हर चीज पर एक समान टैक्स होगा और एक समान रेट होगा. फिर भी आज तक पेट्रोल-डीजल पर सभी राज्य मनमानी करते हुए अपने अपने हिसाब से वैट वसूल रहे हैं.
जीएसटी के दायरे में लाने पर क्‍या फायदा
गोयल ने कहा कि अगर पेट्रोल डीजल को GST के स्लैब 28% या 18% में शामिल किया जाए तो पेट्रोल डीजल की दरों में 15-20 % कमी हो सकती है. इसके अलावा एक विकल्प यह है कि अभी एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल और डीजल पर पूरे देश में एकसमान है. इसके ऊपर हर राज्य अपने हिसाब से वैट की दर वसूलते हैं. जिस तरह एक्साइज ड्यूटी प्रति लीटर पर लगता है, उसी तरह जीएसटी को भी प्रति लीटर लगाया जाए. इससे सरकार को राजस्व में भी नुकसान नहीं होगा, सभी राज्य आसानी से संतुष्ट हो सकते हैं.
Share.
Leave A Reply

© 2026 Nation27

Exit mobile version