भारतीय जनता पार्टी में एक नए राजनीतिक चेहरे की एंट्री की खबर पश्चिम बंगाल से लेकर ओडिशा तक की हलचल तेज हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता और सांसद अनिल बलूनी की घोषणा के बाद देबाशीष सामंतराय ने आधिकारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता ले ली. बीजू जनता दल से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पारी को लेकर भविष्य पर भी प्रतिक्रिया दी और उनकी भूमिका पर संकेत दिए गए। ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने आज भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। बीजू जनता दल (बीजद) छोड़कर भाजपा के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू करने का फैसला लेने वाले देबाशीष पर बीजद ने स्वार्थ के कारण पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया है।
अनिल बलूनी का बड़ा दावा, ‘एक आदर्श राष्ट्रवादी जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बनेगा’
पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों में करीब तीन हफ्ते बाद मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और उत्तराखंड से सांसद अनिल बलूनी ने बड़ा संकेत दिया। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एक लोकतांत्रिक और प्रभावशाली पार्टी की समिति बनी। उनके इस पोस्ट के सामने ही नई पॉलिटिकल एंट्री को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। इसका असर पश्चिम बंगाल से लेकर ओडिशा तक राजनीतिक गलियारों में साफ नजर आया।
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इसी के बीच ओडिशा में देबाशीष सामंतराय के राजनीतिक रुख और पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी के दौरे को देखते हुए दोनों राज्यों में राजनीतिक बदलाव को लेकर नए फैसले हो गए हैं।
बीजू जनता दल के सांसद देबाशीष सामंतराय की बेरोजगारी के बाद शनिवार को मजबूत हलचल, अटकलों का दौर तेज
दरअसल बीजेडी के वरिष्ठ नेता देबाशीष सामंतराय ने सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ-साथ राज्यसभा से भी अपना पद छोड़ दिया। समंतराय ने आरोप लगाया कि पार्टी में उन्हें लगातार नीचा दिखाया जा रहा था और उनकी अनदेखी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के करीबी होने के बावजूद उन्हें पार्टी प्रमुख से मिलने तक नहीं दिया जा रहा था।
पार्टी पर लगाए थे गंभीर आरोप
दो बार विधायक रह चुके समंतराय पहले भी नवंबर 2025 में बीजेडी वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके थे। उस समय भी उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेडी अब पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की विचारधारा से दूर हो चुकी है। समंतराय ने सवाल उठाया कि बीजू पटनायक की विरासत को ऐसे लोगों के हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है, जिनका उस विरासत से कोई सीधा संबंध नहीं है।
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