अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्ध रोकने वाले समझौते पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही डील को करीब बताया है, लेकिन इसके शब्दों और शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी भी मतभेद बने हुए हैं। हालांकि, इस बीच तेल बाजार में कुछ हद तक स्थिरता और राहत देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच जिस संभावित समझौते की घोषणा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को की थी, उस पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर एक प्रारंभिक MoU लगभग तैयार है, लेकिन इसकी भाषा और कुछ शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच अभी भी बातचीत जारी है। इसी कारण इस समझौते को अंतिम रूप देने में कुछ समय और लग सकता है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान बड़े मुद्दों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है, लेकिन दस्तावेज के कई बिंदुओं की शब्दावली पर चर्चा जारी है। अमेरिका कुछ शर्तों में बदलाव चाहता है, जबकि ईरान की ओर से भी मंजूरी की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। अधिकारी के मुताबिक, कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। जैसे ही दोनों पक्ष पूरी तरह सहमत होंगे, तब औपचारिक रूप से हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जा सकता है।
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ईरान के साथ डील को लेकर अमेरिका में ट्रंप की लगातार आलोचना हो रही है, यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के कुछ नेता भी उनके फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। इस पर जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता होता है तो वह “अच्छा और सही” होगा। उन्होंने बराक ओबामा के कार्यकाल के परमाणु समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि उस डील से ईरान को आर्थिक मदद मिली और परमाणु क्षमता बढ़ाने का रास्ता खुला, जबकि उनकी संभावित डील इससे बिल्कुल अलग होगी। ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि समझौता अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, और इसके बावजूद लोग बिना दस्तावेज देखे ही उसकी आलोचना कर रहे हैं। मसौदा समझौते के अनुसार, अमेरिका और ईरान 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हो सकते हैं। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग के लिए पूरी तरह खोला जाएगा और ईरान वहां बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाएगा।इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी कुछ पाबंदियों में राहत दे सकता है, जिससे ईरान को तेल निर्यात फिर से बढ़ाने का मौका मिलेगा। साथ ही इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अगली चरण की बातचीत भी शुरू करने की योजना है।
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