LucknowNews: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने चंपत राय के बयान दर्ज किए हैं। बंद कमरे में घंटों पूछताछ चली। मामले में जल्द ही बैंक अधिकारियों समेत अन्य लोगों से पूछताछ हो सकती है। रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पूछताछ करके उनके बयान दर्ज किए हैं। बंद कमरे में घंटों तक हुई बातचीत में चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था, दान की प्रक्रिया और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर सवाल किए गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। जांच एजेंसी चढ़ावे के संग्रह, गिनती और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।

बैंक से पुलिस ने अहम दस्तावेज किए जब्त, जांच तेज

उधर, पुलिस की एक टीम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या धाम शाखा भी पहुंची, जहां राम मंदिर का बैंक खाता संचालित है। जांच के दौरान पता चला कि शाखा में कार्यरत दो कर्मचारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप को आउटसोर्सिंग स्टाफ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों में से छह आरोपी इसी बैंक के आउटसोर्सिंग कर्मचारी हैं, जो चढ़ावा गिनने और उसके बाद चढ़ावे को बैंक में जमा करवाने की ड्यूटी पर तैनात थे। इसमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर आदि हैं। बैंक से जरूरी कागजात लेकर पुलिस टीम निकल गई है।

अत्यधिक दबाव के चलते दिया इस्तीफा, पद से हटे अधिकारी

चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद से ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा सवालों से घिरे हुए थे। 20 दिनों तक मामले में लीपापोती होती रही। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पदाधिकारियों से इस्तीफा मांगा गया था. लेकिन वह देने को तैयार नहीं हो रहे थे। जब दबाव हद से अधिक हो गया तब जाकर इस्तीफा दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इस संबंध में पत्र जारी किया था। इसमें ये भी लिखा था कि इस्तीफे पर न्यास की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी। इसको लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
हर कार्रवाई में लगातार हो रही देरी, सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में कदम कदम पर खेल किया गया। कार्रवाई में देरी की गई। पहले मामला दबाया गया। फिर बमुश्किल एसआईटी का गठन हुआ और 20 दिन बाद एफआईआर हुई। यही हाल जिम्मेदारों के इस्तीफा देने में हुआ। तीन हफ्ते बाद इस्तीफा दिए गए। वहीं अब उस कार्रवाई के लिए भी दो हफ्ते से अधिक टाल दिया गया है, क्योंकि बैठक 11 जुलाई को होगी। चर्चा ये भी है कि कहीं मामले को रफादफा करने के लिए तो ऐसा नहीं किया जा रहा। अब ये वक्त ही बताएगा।
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