NewDelhi: देश की सर्वोच्च अदालत से एक बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का चेहरा बदल गया है। जस्टिस जे के माहेश्वरी आज रविवार को सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके स्थान पर अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा कॉलेजियम के नए सदस्य बन गए हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के पांचवें सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। जस्टिस नरसिम्हा इस बेहद शक्तिशाली कॉलेजियम में दो मई 2028 तक रहेंगे। इसी दिन वह सेवानिवृत्त भी होंगे। दूसरी ओर, करीब पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद जस्टिस माहेश्वरी ने आज अपना पद छोड़ दिया है।

“नई टीम में कितने जज शामिल? कॉलेजियम बदलाव पर बढ़ी चर्चा

जस्टिस माहेश्वरी की विदाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप सामने आ गया है। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम में अब देश के दिग्गज न्यायाधीश शामिल हैं। इस नई टीम की कमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों में है। उनके साथ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश और अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा इसमें शामिल हो चुके हैं। यही वो पांच सबसे वरिष्ठ जज हैं, जिनके कंधों पर अब भारतीय न्यायपालिका के भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

क्या है कॉलेजियम और कैसे करता है काम? 

भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति की यह व्यवस्था बेहद अनूठी है। कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच शीर्ष जज मिलकर काम करते हैं। यही समिति सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति करती है। जजों के तबादले और उनकी पदोन्नति का फैसला भी यही कॉलेजियम लेता है। इस व्यवस्था में केंद्र सरकार की भी अपनी भूमिका होती है। सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकती है। हालांकि, नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम दोबारा वही नाम भेज दे, तो सरकार को उसे स्वीकार करना होता है। लेकिन कई बार सरकार फाइलों को रोक लेती है या उन पर जवाब नहीं देती है।

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