तेज बारिश ने एक बार फिर Old Faridabad रेलवे अंडरपास की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश के बाद अंडरपास में इतना पानी भर गया कि वहां से गुजरना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। शाम करीब सात बजे तक अंडरपास में करीब 25 से 30 फीट पानी जमा हो गया। इसी दौरान एक करीब 60 वर्षीय व्यक्ति फॉर्च्यूनर लेकर अंडरपास में उतर गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश भी की, लेकिन वह आगे बढ़ गया।
कुछ ही दूरी तय करने के बाद फॉर्च्यूनर गहरे पानी में फंस गई। देखते ही देखते पानी कार के अंदर तक पहुंच गया और चालक भी डूबने लगा। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत बचाव की कोशिश शुरू की और काफी मशक्कत के बाद चालक को कार से बाहर निकाला।
लोगों ने किया था मना, फिर भी पानी में उतारी कार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंडरपास में पानी का स्तर काफी ज्यादा था। सड़क पर पानी की गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। लोगों ने फॉर्च्यूनर चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश की और पानी की स्थिति के बारे में बताया, लेकिन चालक ने शायद यह अंदाजा नहीं लगाया कि पानी इतना गहरा हो सकता है। जैसे ही कार कुछ दूरी तक पहुंची, वह पानी में फंस गई। इसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। चालक कार से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन पानी ज्यादा होने के कारण वह डूबने लगा।
पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचाई जान
हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए दौड़ लगाई। पुलिसकर्मियों ने भी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर चालक को बाहर निकालने की कोशिश की। समय रहते उसे पानी से बाहर निकाल लिया गया, जिससे उसकी जान बच सकी।
हालांकि, पानी में काफी देर तक फंसे रहने के कारण चालक की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे तुरंत नीलम चौक स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए वेंटिलेटर पर रखा है। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
बारिश होते ही अंडरपास में बढ़ जाता है खतरा
Old Faridabad रेलवे अंडरपास में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश के दौरान यहां हर बार हालात बिगड़ जाते हैं। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही अंडरपास से निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन पानी में फंस चुके हैं और लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर वहां से निकलना पड़ा है।
हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बारिश के दौरान इस अंडरपास को लेकर पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। जब पानी खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, तो अंडरपास के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर रास्ता पूरी तरह बंद करने की जरूरत होती है, ताकि कोई वाहन चालक जोखिम लेकर पानी में न उतर सके।
हर बारिश में सामने आती है व्यवस्था की पोल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद अंडरपास में पानी जमा होना अब आम बात बन गई है। समस्या सिर्फ जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी की गहराई और उसकी स्थिति का सही अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में वाहन चालक कई बार इसे सामान्य पानी समझकर आगे बढ़ जाते हैं और कुछ ही सेकेंड में बड़ा हादसा हो सकता है। फॉर्च्यूनर के अंडरपास में फंसने की घटना भी इसी खतरे की एक गंभीर मिसाल है। अगर स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने समय रहते चालक को बाहर नहीं निकाला होता, तो हादसा और ज्यादा बड़ा हो सकता था।
सवाल यह कि कब सुधरेगा अंडरपास?
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में अंडरपास की यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। पानी निकासी की व्यवस्था, पंपिंग सिस्टम और बारिश के दौरान ट्रैफिक को रोकने जैसे इंतजामों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
हादसे में घायल चालक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि बारिश के दौरान Old Faridabad अंडरपास से गुजरना कितना खतरनाक हो सकता है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय बारिश शुरू होते ही ऐसे संवेदनशील इलाकों में पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे, ताकि अगली बार कोई वाहन इस तरह पानी में फंसकर जानलेवा स्थिति में न पहुंचे।


