पाकिस्तान में सरकार को वहां की जनता द्वारा चुने हुए नेता नहीं, बल्कि वहां पल रहे आतंकवादी चलाते हैं ये बात किसी से छिपी नहीं है। यह बात तब और साफ हो गई जब इजरायल से जुड़े ‘अब्राहम अकॉर्ड’ पर बवाल मचा है। इस मामले में एंट्री हुई है पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी की, सैफुल्लाह अब पाकिस्तान को ही तबाह करने वाला है। कर्ज के बोझ से दबा पाकिस्तान बड़ी मुसीबत में फंसने वाला है। क्योंकि एक तरफ तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा संदेश है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में ही पल रहे आतंकी उसे तबाह करने की तैयारी कर चुके हैं।
खुद के बुने जाल में फंसा पाकिस्तान!
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों के सामने एक बड़ा दांव चला है। ट्रंप ने कहा है कि यदि इन देशों को अमेरिका के साथ रिश्ते कायम रखने हैं, तो उन्हें ‘अब्राहम अकॉर्ड’ का हिस्सा बनना होगा, जिसका सीधा मतलब है—इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता देना । ऐसे में पाकिस्तान के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया क्योंकि पाकिस्तान हमेशा ही अमेरिका की गोद में बैठा दिखता है, और इधर लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने अपनी ही सरकार को खुलेआम धमकी दे दी । कसूरी ने कहा, ‘जो भी इजरायल को कुबूल करेगा, वो हुक्मरान हो, बादशाह हो या कोई भी हो, वो तबाह और बर्बाद हो जाएगा। मुस्लिम उम्मत दुनिया के सबसे बड़े गुंडे इजरायल को कभी तस्लीम नहीं करेगी’। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ट्रंप का ऑफर ठुकरा चुके हैं, उन्होंने कहा है कि जब तक एक आजाद फिलिस्तीन देश नहीं बन जाता, पाकिस्तान किसी भी कीमत पर इजरायल को मान्यता नहीं देगा, हालांकि, ये फैसला उन्हें नहीं मुनीर को लेना है, जिन पर ट्रंप का प्रेशर है।
क्या है ‘अब्राहम अकॉर्ड’ ?
दरअसल साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान एक समझौता हुआ था, इस समझौते का मकसद इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच कूटनीतिक, व्यापारिक साथ ही सैन्य संबंध सामान्य बनाना है। UAE, बहरीन, सूडान और मोरक्को जैसे मुस्लिम देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, लेकिन अब ट्रंप सऊदी अरब, कतर, तुर्की और पाकिस्तान पर दबाव बनाकर इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं।
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा संकट!
पाकिस्तान के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अगर पाकिस्तान डोनाल्ड ट्रंप की बात नहीं मानता और अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो अमेरिका पाकिस्तान को आर्थिक मदद नहीं देगा, और अगर उन्होंने अमेरिका के दबाव में आकर इजरायल को मान्यता दे दी, तो पाकिस्तान के भीतर सिविल वॉर छिड़ना लगभग तय है। क्योंकि उसी के पाले हुए आतंकी उसकी मुसीबतें बढ़ाएंगे। लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करते रहे हैं, या फिर ये भी कह सकते हैं पाकिस्तान आतंकियों को भारत के खिलाफ पालता रहा है, लेकिन अब ट्रंप की चाल से पाकिस्तान बड़े संकट में उलझ गया है। क्योंकि ट्रंप का अब्राहम अकॉर्ड आतंकियों को पसंद नहीं आ सकता, ऐसे में ये आतंकी पाकिस्तान ही नहीं उन मुस्लिम देशों में भी आतंकवाद फैलाएंगे जो इजरायल को मान्यता दे रहे हैं। और ये बात लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी के तेवरों से साफ दिख रहा है।

