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महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली शराब ने एक बार फिर कहर बरपाया है। पिछले 24 घंटे में हडपसर, फुगेवाड़ी, दापोडी और पिंपरी इलाके में 15 लोगों की मौत हो गई। मौत का कारण जहरीली शराब बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग हरकत में आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों में गुस्सा है और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुणे में सोमवार से मंगलवार के बीच अचानक कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। हडपसर में 6, फुगेवाड़ी में 4, दापोडी में 3 और पिंपरी में 2 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि शराब पीने के कुछ घंटे बाद ही उल्टी, चक्कर और पेट दर्द की शिकायत हुई। कुछ को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मामला सामने आते ही पुणे पुलिस और राज्य आबकारी विभाग ने जॉइंट कार्रवाई शुरू की। अब तक 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें एक बड़ा अवैध शराब कारोबारी भी शामिल है। पुलिस को शक है कि शराब में मेथेनॉल मिलाया गया था। मेथेनॉल इंडस्ट्रियल अल्कोहल है, जिसकी थोड़ी सी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है। फॉरेंसिक टीम ने शराब के सैंपल और मृतकों का विसरा जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की असली वजह साफ होगी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इलाके में प्रतिबंधित हाथ भट्टी की जहरीली शराब खुलेआम बिक रही थी। दिहाड़ी मजदूर सस्ती होने के कारण यही शराब खरीदते थे। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी पुलिस ने अवैध अड्डों पर कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही ने 15 घरों के चिराग बुझा दिए। घटना के बाद पिंपरी-चिंचवड़ में तनाव का माहौल है।राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता और पूर्व महापौर योगेश बहल ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कारोबारियों पर नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बहल ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी की है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शराबबंदी के दावे सिर्फ कागजों में हैं।हालांकि, पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस का बयान अलग है। पुलिस का कहना है कि 5 लोगों की मौत अलग-अलग स्वास्थ्य कारणों से हुई है। लेकिन पुलिस ने यह भी माना कि कई मृतकों को मौत से पहले चक्कर आए थे और आंखों की रोशनी जाने की शिकायत थी। ये लक्षण मेथेनॉल पॉइजनिंग की ओर इशारा करते हैं। इसी वजह से पुलिस जहरीली शराब के एंगल से भी जांच कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुणे के कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी है। सीएम ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। आबकारी विभाग ने भी पुणे जिले में अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है। मंगलवार रात तक 12 जगहों पर रेड की गई और 200 लीटर से ज्यादा कच्ची शराब जब्त की गई।डॉक्टरों के मुताबिक मेथेनॉल पीने के 6 से 24 घंटे के अंदर असर दिखता है। पहले नशा जैसा लगता है, फिर उल्टी, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और अंधापन हो सकता है। समय पर इलाज न मिले तो किडनी फेल होने से मौत हो जाती है। पुणे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से कई को अस्पताल पहुंचने का मौका ही नहीं मिला।पुणे में जहरीली शराब से मौत का यह पहला मामला नहीं है। 2022 में भी यवत इलाके में 7 लोगों की जान गई थी। हर बार कार्रवाई के दावे होते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर अवैध अड्डे शुरू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत के बिना यह कारोबार चल ही नहीं सकता। पुणे की इस घटना ने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी है। 24 घंटे में 15 मौतें बताती हैं कि अवैध शराब का जाल कितना गहरा है। हिरासत में लिए गए 8 आरोपियों से पूछताछ जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन कारोबारियों को संरक्षण कौन दे रहा है। मुख्यमंत्री के जांच आदेश के बाद उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई परिवार जहरीली शराब की भेंट न चढ़े। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी, लेकिन तब तक 15 परिवारों का दर्द कम नहीं होगा। अवैध शराब के खिलाफ सिर्फ छापेमारी नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।

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