UttarpradeshNews: राजधानी लखनऊ में अपने स्कूल पर चल रहे संकट को देखकर भावुक हो गए और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की। छात्रा का कहना है कि उनका स्कूल ही उनके भविष्य की नींव है और अगर इसे बंद कर दिया गया या हटा दिया गया, तो उनकी पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से स्कूल जाने की अपील करते हुए कहा कि उनके लिए अंतिम पास शिक्षा हासिल करने के लिए दूसरा विकल्प होगा। लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित नरही में संचालित सहायता प्राप्त विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल को खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में शनिवार को छात्राएं, अभिभावक और शिक्षक प्रदर्शन पर उतर आए। सभी ने स्कूल परिसर के बाहर हड़ताल करते हुए प्रशासन के फैसले का विरोध किया। इस दौरान छात्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्कूल में दखलअंदाजी की अपील की। उनका कहना है कि स्कूल को लेकर चल रहे विवाद के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और भविष्य में अनिश्चितता पैदा हो गई है। मूर्ति और इतिहास ने आरोप लगाया कि स्कूल पर कब्जा कर लिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था संकट में पड़ गई है। धरने में शामिल अभिभावकों ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपनी बेटियों को निजी स्कूलों में पढ़ा सकें। उनका कहना था कि दिनभर मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोगों के लिए यह विद्यालय ही सहारा है। यदि विद्यालय बंद हुआ तो गरीब परिवारों की बेटियां शिक्षा से वंचित हो जाएंगी।शनिवार को चल रहे धरने में छात्राओं को समर्थन देने के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे। माध्यमिक शिक्षक संघ के अलग-अलग गुटों और अन्य शिक्षक नेताओं ने प्रदर्शन में शामिल होकर विद्यालय के पक्ष में आवाज उठाई। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि जिला प्रशासन की कथित मिलीभगत से योजनाबद्ध तरीके से स्कूल की जमीन पर कब्जा कराने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि प्रदेश के कई सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान पहले भी इसी तरह के विवादों और दबावों का सामना कर चुके हैं, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।विद्यालय की प्रबंधक संतोष रस्तोगी ने साफ कहा कि किसी भी हाल में स्कूल को बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए विद्यालय के मुख्य द्वार पर ही कक्षाएं संचालित की जाएंगी। रस्तोगी के अनुसार, वर्ष 1936 से संचालित यह विद्यालय लंबे समय से छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर रहा है और यहां कार्यरत शिक्षकों तथा कर्मचारियों का वेतन सरकार की ओर से दिया जाता है। वर्तमान में स्कूल में करीब 250 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को हजरतगंज पुलिस की मौजूदगी में एडीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विद्यालय परिसर को खाली कराया गया था, जिसके बाद छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई।
मुख्यमंत्री से लेकर गृह सचिव तक गुहार, स्कूल बचाने की मांग पर अड़ीं छात्राएं
विद्यालय प्रबंधन एवं अभियंता संघ ने मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित शिक्षा एवं गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस आयुक्त और नामांकन को शिकायत पत्र भेजा है। उनका कहना है कि विद्यालय भवन को लेकर चल रहे विवाद पर पिछले चार वर्षों से अदालत में विचार किया गया है और इस पर अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।शिकायत के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 को अपर जिलाधिकारी (नगर पूर्वी) द्वारा विद्यालय खाली कराने का आदेश जारी किया गया था। इसके खिलाफ प्रबंधन ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर कर राहत की मांग की है, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है। विद्यालय प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान पुलिस बल और कुछ अन्य लोगों के साथ विद्यालय परिसर में पहुंचकर वहां रखा फर्नीचर, सरकारी दस्तावेज, अलमारियां, पंखे और कूलर बाहर निकाल दिए गए। प्रबंधन का दावा है कि यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले की गई, जिससे विद्यालय की व्यवस्था और छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
बेटियों की गुहार: “अब हम कहां पढ़ेंगे?” स्कूल बचाने की मांग तेज
मेरे पिता मजदूरी करते हैं। मैं कक्षा एक से इसी विद्यालय में पढ़ रही हूं। जिन सीटों पर हम पढ़ते थे, उन्हें मैदान में फेंका हुआ देखा। मुख्यमंत्री जी से अपील है कि विद्यालय खुलवाया जाए। -श्रेया कश्यप
मेरा सपना पढ़-लिखकर कुछ बनने का है। मेरे पिता मुझे निजी स्कूल में पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। विद्यालय का सामान पुलिस की मौजूदगी में बाहर फेंका गया। विद्यालय दोबारा खुलवाया जाए। -जूही
मुख्यमंत्री जी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि मेरा विद्यालय बंद होने से बचाया जाए। गर्मियों की छुट्टियों के बाद हम कहां पढ़ने आएंगे, यह भी बताया जाए। -अलीशा सिद्दीकी
आर्थिक तंगी के बीच मेरी पढ़ाई चल रही है। यदि विद्यालय बंद हो गया तो मेरी पढ़ाई का सहारा खत्म हो जाएगा। –तनीशा दीक्षित
आज विद्यालय पहुंची तो दूसरे लोगों का ताला लगा हुआ था। कक्षा का सामान मैदान में फेंका हुआ देखकर बहुत दुख हुआ। अधिकारियों से अपील है कि विद्यालय फिर से खुलवाया जाए।


