निठारी कांड से सुर्खियों में आए Surendra Koli ने क्यों की खुदकुशी, जानिए बड़ी वजह - Nation27 >

हरिद्वार: नोएडा के चर्चित निठारी कांड से सुर्खियो में आए सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) ने हरिद्वार में चाय की दुकान में फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली। सुरेंद्र कोली को हरिद्वार में लोग सदाराम के नाम से जानते थे क्योंकि उसने अपना नाम बदल लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसे चाय दुकान खोले हुए महज तीन दिन ही हुए थे लेकिन शुक्रवार को जब काफी समय तक दुकान बंद नहीं खुलने पर मालिक ने शटर उठाया तो सुरेंद्र कोली फंदे से लटका हुआ मिला। अब ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सुरेंद्र कोली ने अपनी जान क्यों दी।

चाय दुकान के मालिक ने क्या बताया

हरिद्वार के भूपतवाला में उस दुकान को सुरेंद्र कोली ने धर्मेंद्र कौशिक से तीन दिन पहले ही किराये पर लिया था। घटना से करीब तीन महीने पहले ही सुरेंद्र कोली हरिद्वार पहुंचा था और वहां सिडकुल में एक सिक्योरिटी कंपनी में नाम बदलकर नौकरी कर रहा था।

उसे चाय दुकान किराये पर देने वाले धर्मेंद्र कौशिक को भी उसका सही नाम पता नहीं था और वो भी उसे सदाराम के नाम से ही जानते थे. उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी की वो नोएडा के चर्चित निठारी कांड का प्रमुख आरोपी रहा सुरेंद्र कोली है.

चाय के दुकान में लटके शव की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में तब हुई जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और उसके झोले से उसका आधार कार्ड बरामद हुआ. उसी से पुष्टि हुई की मरने वाला व्यक्ति सुरेंद्र कोली था।

मौत से एक दिन पहले परेशान था सुरेंद्र कोली

सुरेंद्र कोली के किराये पर दुकान देने वाले शख्स धर्मेंद्र कौशिक ने बताया कि वो काफी डिप्रेशन में था. मौत से एक दिन पहले वो काफी परेशान दिख रहा था। धर्मेंद्र कौशिक ने बताया कि गुरुवार को उसके घर में किसी बच्चे का जन्मदिन था लेकिन उसके पास एक भी पैसे नहीं थे। यह सुनकर उन्होंने सुरेंद्र कोली को 2000 रुपये दिए थे लेकिन अगले दिन ही उसने अपने जीवन को खत्म कर लिया।

सुरेंद्र कोली की खुदकुशी को लेकर दूसरा दावा ये किया जा रहा है कि दरअसल जिस दुकान को उन्होंने किराये पर लिया था उसको लेकर कार्रवाई होने वाली थी। हरिद्वार में अगले साल कुंभ मेला लगने वाला है जिसको लेकर स्थानीय प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी को लेकर उसे आशंका थी कि उसकी चाय की दुकान को भी हटा दिया जाएगा।

क्या है निठारी कांड

साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव (सेक्टर 31) में एक कोठी के पीछे नाले से बच्चों और महिलाओं के कंकाल और मानव खोपड़ी मिली थी. इसके बाद पूरे देश में इसको लेकर सनसनी मच गई।

जब मामला सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो इसकी आंच कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर तक पहुंची। उन्हीं के घर में सहायक सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक था जिस पर हत्या में शामिल होने, बलात्कार जैसे संगीन आरोप लगे। पुलिस जांच के बाद मामला CBI को सौंपा गया, जिसमें कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने और हत्या के आरोपों की जांच हुई।

27 दिसंबर 2006 को सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह केस लंबे समय तक अदालतों में चला। निचली अदालतों ने सुरेंद्र कोली को दोषी माना था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरेंद्र कोली इस केस से बरी कर दिया था। इस दौरान वो कई सालों तक जेल में रहा था और पिछले साल ही वो बाहर आया था।

रिपोर्ट: कुणाल कौशल

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