आज 14 सितंबर 2026, सोमवार है और धार्मिक नजरिए से यह दिन बेहद खास माना जा रहा है। आज देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम है, वहीं कई घरों में महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत भी रख रही हैं। एक ही दिन दो प्रमुख पर्व होने से सुबह से ही मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कहीं गणपति बप्पा की मूर्ति घर लाई जा रही है तो कहीं महिलाएं तीज के लिए सज-धजकर पूजा की तैयारी कर रही हैं। बाजारों में भी गणेश प्रतिमाओं, फूलों, पूजा सामग्री और मिठाइयों की खूब मांग देखने को मिल रही है।
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता यानी सभी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। यही वजह है कि किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग घर में गणपति की मूर्ति स्थापित करते हैं। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की जाती है और आरती होती है। गणपति को मोदक और लड्डू का भोग लगाने के साथ दूर्वा भी चढ़ाई जाती है। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में गणेश उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिलता है। बड़े-बड़े पंडाल सजते हैं, ढोल-नगाड़े बजते हैं और लोग पूरे उत्साह के साथ बप्पा का स्वागत करते हैं।
अब बात हरतालिका तीज की। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं से जुड़ा है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कई महिलाएं हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत भी रखती हैं। हालांकि व्रत रखने की परंपरा हर परिवार में थोड़ी अलग हो सकती है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से हरतालिका तीज को शिव-पार्वती के प्रेम और दांपत्य जीवन से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, नए कपड़े पहनती हैं और शिव-पार्वती की पूजा के बाद तीज की कथा सुनती हैं। कई जगहों पर महिलाएं एक साथ बैठकर भजन-कीर्तन भी करती हैं।
14 सितंबर को दोनों पर्व होने की वजह से आज कई घरों में सुबह से ही अलग-अलग तरह की तैयारियां चल रही हैं। गणेश चतुर्थी के लिए जहां गणपति की स्थापना की जा रही है, वहीं हरतालिका तीज रखने वाली महिलाएं पूजा की सामग्री तैयार कर रही हैं। गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाया जाएगा, जबकि हरतालिका तीज पर महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर अपने परिवार और वैवाहिक जीवन के सुख की कामना करेंगी।
गणेश चतुर्थी के साथ ही गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ दिनों के लिए गणपति को घर लाते हैं। रोजाना पूजा और आरती के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदाई दी जाती है। गणपति विसर्जन के दौरान शहरों में अलग ही नजारा देखने को मिलता है। भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति की प्रतिमा लेकर निकलते हैं और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के बीच उन्हें विदाई देते हैं।
इस बार 14 सितंबर का दिन इसलिए खास है क्योंकि गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज दोनों पर्व एक ही दिन पड़ रहे हैं। एक तरफ लोग गणपति बप्पा का स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा और व्रत में जुटी हैं। आज का दिन घर-घर में आस्था, पूजा और उत्सव का माहौल लेकर आया है। गणेश चतुर्थी जहां नई शुरुआत और विघ्नों को दूर करने की मान्यता से जुड़ी है, वहीं हरतालिका तीज प्रेम, आस्था और दांपत्य सुख की कामना का पर्व है।

